लाल गुलाब की अभिलाषा
मंजू अशोक राजाभोजभंडारा (महाराष्ट्र)******************************************* लाल गुलाब से एक दिन मैं यूँ ही पूछ बैठी,आखिर क्या हमसे है रहती, तुम्हारी अभिलाषा ? वह मुझसे कहने लगा,-बहुत दिनों से थी, मेरे मन में यह एक आशाकोई आकर पूछे मुझसे,आज समझाता हूँ मैं तुम्हें, अपनी मूक भाषा।हाँ, अपनी मूक भाषा…जब कोई मुझे ईश्वर के शीश है चढ़ाता,प्रभु के … Read more