पड़ोसी मत उछल
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* क्यों बे पड़ोसी! आजकल तू बहुत उछल रहा,औकात भुलाकर अपनी, हमें ही आँखें दिखा रहा। क्या भूल गया वो दिन, जब तेरा अस्तित्व न था,अहसान तुझ पर कर पड़ोस में रहने स्थान दिया। नंगा फ़क़ीर था, तब तन ढकने कपड़ा दिया,भूखा मर रहा, तब पैसा देकर अहसान किया। गरीब था तब, … Read more