मैं और तुम
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मैं और तुम थे अलग-अलग,पता नहीं! कब और कैसेएक हो गए, हम हो गए…,वक्त के साथ चलते रहेसाथ-साथ एक पटरी पर,समानांतर रेल की तरह। एक दिन अचानक,यह अहसास दिलाया तुमनेसमानांतर का अंतर शायद,हमारे बीच जैसे कहीं बढ़ रहा होकहीं मुझसे कोई गलती हो गई,या तुम ही खुद गलती कर बैठे। फिर … Read more