हमारा बिहार

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** भारत के ईशान विराजे,कंठ मालिका मणि बन साजेइसकी महिमा है अति भारी,जनक सुता की धरणी प्यारी। देवासुर जब जलधि मथाया,मंदार को मथनी बनायाचौदह रत्न यहाँ से पाया,विश्व को अमृत कलश दिलाया। शासन का नया अर्थ बताया,जन को गण का सार सुनायालिक्ष्वी को गणराज्य बनाया,दुनिया को नया मार्ग दिखाया। विद्यापति की धरा … Read more

आता है क्रोध

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* करते जन ढोंग-ढकोसला, स्वांग दिखावा होड़म-होड़,सबको बनना दूसरों जैसा, अपने जैसा बनना छोड़जीवन में ला रहे गतिरोध, मुझको तब आता है क्रोध…। दूसरों के घरों ताक-झांँक, टांग अड़ाते बढ़ते देख,अच्छे को अच्छा कह न सके, भल में निकाले मीन मेखअपना अवगुण करते न शोध, मुझको तब आता है क्रोध…। जिसके लिए कर्मचारीगण, … Read more

साहित्य अकादमी की नव पहल कृष्णकुमार अष्ठाना स्मृति प्रसंग

इंदौर (मप्र)। प्रख्यात बाल साहित्यकार कृष्ण कुमार अष्ठाना अब संस्कृति मंत्रालय के कला पंचांग में सम्मिलित होकर प्रतिवर्ष स्मरण किए जाएंगे। उनको यह श्रद्धासुमन बाल साहित्य विमर्श के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे। बाल साहित्य में रुचि रखने वाले सभी साहित्यकार एवं शोधार्थियों के लिए यह शुभ सूचना है कि राष्ट्रीय स्तर की यह संगोष्ठी … Read more

कविता दिल का अनमोल मीत

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व कविता दिवस’ (२१ मार्च) विशेष… यह शब्दों की माला, है भावों का गीत,हर कविता है दिल का अनमोल मीत। इसमें सपनों की राहें, उम्मीदों के रंग,हर पंक्ति में है छिपा जीवन का संग। यह चाँद की चाँदनी तो सूरज की धूप,सुंदर कविता से भरता है हर मन का रूप। पंछी … Read more

अपने को पहचान

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ तेरा अपना वजूद है,तू कमजोर नहींफिर क्यों हार रहा है ज़िंदगी से,अपने को पहचान। नफ़रत के इस माहौल में,तू राह मत भटकआगे की सोच, क्यों परेशान है!अपने को पहचान। एक-दूसरे का सहारा बन,जीवन में आगे बढ़ज़िन्दगी है, दोबारा नहीं मिलती,अपने को पहचान। परेशानियों में तू हार मत मान,संघर्ष ही जीवन … Read more

कृष्ण भक्ति आवली

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** हे मेरे श्याम सुंदर, जप लूँ तेरा नाम,हाथ जोड़ विनती सुनो, हे प्राणों के प्राण। मुझे प्रेरणा तुम देना, रखना सिर पर हाथ,मेरे मन अभाव भाव, भरना भाव भण्डार। मेहर करो हे कृष्ण जी, मैं लिखती ही जाऊँ,नाम मेरा हो जाए, कर दे तू गर काम। राधा-मीरा मैं नहीं, न … Read more

भूख है लाचारी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भूख, ग़रीबी है लाचारी,कितनों की यह है हत्यारीसबसे बड़ा शत्रु समझो तुम,इसके पीछे दुनिया हारी। भूख की अग्नि जब जलती है,कहाँ किसी की वह सुनती हैपाप-पुण्य और यश-अपयश,समझो नहीं अंतर करती है। समझें जो धन ही सब कुछ है,इससे बड़ा न जग में कुछ हैउसको मैं क्या कहूँ बताओ,उससे बड़ा न मूर्ख … Read more

आई होली, लाई खुशियाँ…

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** रंग बरसे… (होली विशेष)… होली आई, होली आई,साथ में खुशियाँ है लाईरंगों का त्यौहार है आया,सभी के घर खुशियाँ है लाया। रंगों के इस त्यौहार में,भूल कर सब गिले-शिकवेदुश्मन को भी,गले लगाते चलो। न जात-पात का हो भेद-भावसभी को रंग लगाते हैं,चलो… ले पिचकारी, गुलाल रंग, चले है घर-घर हम…वृंदावन मथुरा … Read more

धरती का श्रृंगार करो

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*************************************** प्रकृति है जीवन दायिनी,मत इसका तिरस्कार करोवन-उपवन खेत-खलिहानों से,धरती का श्रृंगार करो। मत तोड़ो पुष्पों को,मत तनों का नुक़सान करोहरे-भरे पेड़ काटकर,पर्वत मत सुनसान करो। रंग-बिरंगी फुलवारी में,ईश्वर का तुम ध्यान करोदूर फेंक दो कुल्हाड़ी को,जन-जन में विश्वास भरो। प्रकृति ही ईश्वर है,जीव-जंतुओं से प्यार करोमत उनको हानि पहुंचाओ,हृदय से सत्कार करो। … Read more

आओ रचें इतिहास दुनिया में

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** ‘विश्व कविता दिवस’ (२१ मार्च) विशेष… आओ मनाएँ दुनिया में ‘विश्व कविता दिवस’,प्राचीनकाल से सृजक हमारा देश दिवसश्लोक, दोहा, संस्कृत कालखण्ड को अर्पित दिवस,सारे कवि आज एकजुट, विश्व में मनाने को दिवस। संस्कृत, देवनागरी से दुनिया में कई क्षेत्रीय भाषा में फैला कविता रस,आदि आर्यावर्त के हर मनुष्य और पक्षी, … Read more