समय कुछ भूलता नहीं…

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* ‘समय’कुछ भूलता नहीं,पुरानी बातों कोमुलाक़ातों को,यादों और वादों कोयाद दिलाता है एक दिन,औरमुस्कुराता है,उसकी मुस्कानबड़ी निर्दयी होती है। यह मुस्कान ही उसका न्याय है,उसके न्याय का विधान हैसंसार उस पर हँसता है,भला-बुरा बोलता रहता हैभला-बुरा करता रहता है,आखिरी दम तकउसका ध्यान रखता नहीं,यह नादान इंसान। बुरे कर्म करते रहता है,पालता है … Read more

सृष्टि सर्जिका जगजननी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… वह संघर्ष से सफलता तक, अद्भुत विधान दर्शाती है,नारी का सम्मान ही जीवन, पौरुषता पथ ले जाती हैसोपानों को चढ़ती नारी, कीर्ति पताका लहराती है,जीवन के हर क्षेत्र अग्रसर, अरमानों को पहुँचाती है। शौर्य वीर चहुँ सीमाओं पर, नार्य वीरता दिखलाती हैचाहे जल … Read more

पुस्तक ‘मुक्तक भारती’ और ‘दोहा भारती’ लोकार्पित

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लखनऊ (उप्र)। कवितालोक लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कवयित्री भारती पायल की पुस्तक ‘मुक्तक भारती’ और ‘दोहा भारती’ का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ (निदेशक, अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी) रहे।इस समारोह के अध्यक्ष डॉ. योगेश (अध्यक्ष नवसृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, लखनऊ), वरेण्य अतिथि डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री (प्राचार्य, जीवनलाल कमलादेवी … Read more

उज्ज्वल भविष्य आधार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सहज, सरल, कोमल हृदय,नारी रूप श्रृंगार…ईश्वर ने भेजा उसे,दे अनुपम उपहार। सृष्टि का अवलम्ब है नारी,आस्था का भण्डार…नैसर्गिक सौंदर्य प्रखर है,यौवन की है बहार। अनुपम शक्ति स्वरूपा नारी,क्षमता अपरम्पार…देख-देख उपलब्धियाँ,नतमस्तक संसार। रिश्ते सभी निभाना आता,मायका या ससुराल…घर, बच्चे, परिवार सम्हाले,कर सबको ख़ुशहाल। कहीं हिमालय जीत रही है,कहीं उड़े आकाश…दूर-दूर तक फैला देखो,उसका … Read more

मुझको सज़ा ये कैसी ?

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** प्यार करने की मिली मुझको सज़ा ये कैसी ?ज़ख़्म देकर वो कहें तुमसे ख़ता ये कैसी। उनसे चाहा था चलो इश्क़ की मंज़िल पा लें,मुस्कुराते ही रहे उनकी रज़ा ये कैसी। अब न सपने हैं, न उम्मीद न चाहत कोई,प्यार में लुट गए फिर मुझको जज़ा ये कैसी। मुझको रुसवा … Read more

चलता हूँ

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** चलता हूँ, बस मैं चलता हूँ,रास्ते हैं बहुत ही मुश्किलपर कहाँ मैं कभी ठहरता हूँ,बस मुश्किलों से ही लड़ता हूँ। चलता हूँ, बस मैं चलता हूँ,हार न कभी मैं मानता हूँपलभर कभी रो लेता हूँ,फिर उठकर संघर्ष करता हूँ। रास्ते में मिले कभी धोखे,कभी किसी ने रास्ते रोकेबस मुस्कुराकर निकलता … Read more

मैं शिव बन जाऊँगी

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष) संसार के ताने-बाने,समाहित करकमलासन मुद्रा में बैठकरलय में,ओंकार का जाप करूँगी। ॐ की ध्वनि,जब ब्रह्माण्ड के ॐनाद से तादात्म्य होगी,नया संसारनिर्मित करूँगी। इसी ध्वनि से,संसृति के सबसे जहरीले जीव सेजहर निकालकर,अमृत बनाऊँगी। सकारात्मक ऊर्जा,के आघात सेनकारात्मक ऊर्जा का,विध्वंस करूँगी। बढ़ते हुए अर्धचंद्र,गंगा पर सजाकरउस पर अलंकृत,बरगद के … Read more

सबसे रिश्ते निभाती नारी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… नारी से नारायणी बन,करती सबका कल्याणसंसार में एक नाम है तेरा,जो जीवन की नैय्या पार लगातीरिश्तों के रूप धरकर,सबसे रिश्ते निभातीनारी से नारायणी बन,असंभव को संभव बनाती। दुःख में संग रहती,खुशियों में भी आँसू बहातीखुद भूखी रहकर,सबके पेट भरवातीनारी तुम इसलिए नारायणी कहलाती। हर पद … Read more

तू दंडकारिणी, स्वयं नारायणी

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… धधक उठी है हृदय में ज्वाला,रूप लिए वो अति विकरालापौरूषता आज बेबस पड़ी है,निकल पड़ी है निर्भया बाला। धरती उसकी, अम्बर भी उसका,चहुंओर बजे जिस का डंकाकांपे रावण सुन नाम सिया का,धू-धू जले पल एक जो लंका। अबला नहीं, तू सबला-तू शक्ति,तू ही साहस की महाभिव्यक्तितेरे … Read more

महकाती आँगन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)…. संसार ‘नारी’,महकाती आँगनहै अनुपम। ‘नारी’ से जग,हर ख़ुशी त्योहारघर श्रृंगार। ‘नारी’ ममता,नारायणी है नारीहै समर्पण। ‘नारी’ रूप माँ,बहन-सुता-वधूमूर्त निःस्वार्थ। ‘नारी’ है प्रेम,सुकून का आँचलअति दुर्लभ। ‘नारी’ है शक्ति,संभाले सब-कुछवात्सल्य मूर्ति। ‘नारी’ सर्वत्र,प्रतिष्ठा दो कुल कीबन कल्याणी। ‘नारी’ बिन क्या,महिला जग धुरीतत्व अस्तित्व। ‘नारी’ है मान,बचाना … Read more