होली है पर्व उमंगों का…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* होलिका जलाते फागुन में,पूर्णिमा नगाड़े की धुन में।बाजार सजा है रंगों का,होली है पर्व उमंगों का॥ प्रहलाद नाम का था बालक,बहुत दुष्ट था जिसका पालक।छोड़ो बोला हरि को जपना,बात न मानी, मन रख सपना।प्रभु दर्शन और सतगुण का,लेता सुख भजन तरंगों का…।होली है पर्व…॥ यह हिरण्यकश्यपु को भाया,अपनी बहना को बुलवाया।जो नहीं … Read more

रंग ऐसा बरसाओ…

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** रंग बरसे…(होली विशेष)…. रंग ऐसा बरसाओमन रंग जाए मेरा,कोरा मन बिन रंगों केअधूरा रहा जैसे रंगहीन। इंद्रधुनष के रंगों को देखातब से हुई जलन पहाड़ों को,अब जब टेसू ने दिएपहाड़ों को रंग तो,आकाश रूठा। जब सूरज ने दिएआकाश को रंग,तब सुबह-शाम सुरमयी होकरआकाश हुआ रंगीन। फूल इतराने लगेक्योंकि उनके अपने रंग … Read more

थिरके नर-नार

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** रंग बरसे… (होली विशेष)… आया होली का त्योहार,छाया सबपे खुमारलेकर रंग गुलाल,देखो आए नंदलाल। संग लेकर ग्वाल-बाल,पहुंचे राधा के द्वारकरने मस्ती अपार,सुंदर है यह त्योहार। लेकर हरा-गुलाबी रंग,राधा आई गोपियों संगकरने रंगों की बौछार,आज कान्हा आए द्वार। बजने लगे ढोल-नगाड़,उसपे थिरके नर-नारभाईचारे की मिसाल,बना होली का त्योहार। उड़े रंगों की फुहार,चले … Read more

रंगों भरी बहार

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रंग बरसे…(होली विशेष)… होली के त्यौहार पर, रंगों भरी बहार।उड़े अबीर गुलाल ही, मस्ती भरी फुहार॥ मस्ती भरी फुहार, फाग सब मिलकर खेलें।नाचे पीकर भंग, प्रेम का रंग उड़ेलें॥ करते मिल हुड़दंग, बोलते मीठी बोली।रंगों का त्यौहार, प्रेम से खेलें होली॥ चढ़ा प्रेम का रंग अब, रहे न ईर्ष्या द्वेष।खेलें … Read more

आकर्षक पलाश

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आकर्षक मन लुभावन, टेसू फूल सुवास।बिन सुगन्ध गेरुवा लसित, फागुन रंग विलास॥ विविध नाम टेसू कुसुम, किंशुक चारु पलाश।फाल्गुनी चैती खिले, सुरभित होता काश॥ खिलने लगे पलाश तरु, मनमोहक उद्यान।खिली खिली मधु माधवी, ऋतु वसन्त उद्भान॥ भव्य मनोहर बिन सुरभि, खिलने लगे पलाश।आकर्षक दुर्जन जगत, सम पलाश मन आश॥ … Read more

रंजिशें मिटाने आ गया

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गया…होली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार है…गृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप है…कुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोग…भंग का … Read more

सरहद पर होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सरहद पर होली हुई, रक्षा की हुंकार।बहे ख़ून पर देश की, करते हैं जयकार॥ खेलें सारे देश के, लोग आज तो रंग।सरहद पर है शौर्य बस, घुसपैठी से जंग॥ सरहद पर सैनिक डटे, लेकर शौर्य अबीर।रँग-गुलाल बलिदान का, खेलें सारे वीर॥ वतनपरस्ती हँस रही, सम्मानित है तेज।सरहद पर हर वीर है, … Read more

होली का बुखार

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* रंग बरसे…(होली विशेष)…. होली में रंगकर, सहेलियों संग खेलकर,घर पहुंची अपने, गुलाल-सी होकर। पतिदेव ने झांका, इधर-उधर तांका,पड़ोसन समझकर, मुझे ही रंग डाला। मैं अचकचाई, कुछ न कह पाई,पतिदेव की हिम्मत थोड़ी बढ़ आई। हाथ थामकर, मिठाई पकड़ाई,थोड़ा रुक जाइए, अभी मैडम नहीं आई। नाश्ते संग नौकर से चाय बनवाई,ना-ना करते-करते, … Read more

नहीं पहचाना न…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* तुम मुझे ढूंढते रहे,यहाँ-वहाँ न जाने कहाँ-कहाँ…नहीं पहचाना न…मैं नारी हूँ। मैं तुम्हारे पास ही रही,थकान में आराम बन कर…बेरोजगारी में काम बनकर,रोग में औषधि बन। दु:ख-सहरा में पयोधि बन,धूप में सुरमयी छाया बन…अंधेरों में भी साया बन,प्यासे कंठ में पानी बन। नानी-दादी की कहानी बन,माँ की मधुर लोरी बन…कभी इठलाती गोरी … Read more

बनो उदाहरण

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* महिमा-मंडित शिक्षित जन सुननापद की गरिमा गिरने ना देना,नवांकुरों के अग्रज हो तुम…साफ-सुथरा परिचय रखना। आस बंधी होती है तुमसेसम्मान मिला तुम्हें है सबसे,ऐसा तेज़ औरा तुम अपना…सदा निशंकित रखना अब से। रहो आदर्श सदा ही सच्चे,स्त्री, पुरुष चाहे हो बच्चे।देख तुम्हें अभिमान करें सब…बनो उदाहरण सबसे अच्छे॥