रस टपके शिव नाम का

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)********************************** अगाध श्रद्धा शिव-शंभू पर शिव की कृपा से होय,दुखिया रोवे रात-दिन पर कृपा पाय कोय-कोय। शिव-शिव शिव-शिव करती रसना रस टपके शिव नाम का,पावन ये चरणामृत पी ले ले आश्रय शिव-नाम का। नाम प्रभु मुख चले निरंतर भूल से हो जाए जो‌ असत,तुरत भस्म हों पाप-कर्म फिर प्रभु का … Read more

अब स्वार्थ अनुबंध

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शहंशाह की चाहतें, जनता नेता लोग।मर्यादा औचित्य अब, बचे कहाँ पद भोग॥ बने अनैतिक कार्य लखि, तमाशबीन समाज।उदासीन सरकार भी, कहाँ उठे आवाज़॥ नींद कलह आलस व्यसन, बाधक पौरुष राह।कहाँ कर्म अनुभूति फल, बस होते गुमराह॥ पद सत्ता वैभव गबन, फँसते भ्रष्टाचार।फँसे स्वयं हिंसा कपट, बनते पहरेदार॥ मुफ़्तख़ोर की … Read more

नि:शब्द प्रेम

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मौन रहकर भी,बहुत कुछ कह गयातुम्हारा निश्छल प्रेम,आँखों से बह गया। लब हिले पर शब्द,मुँह में ही रह गएजो कहना था,नयनों से बयां हो गया। क्यों नहीं जान पाया,बोलना, सुनना अपरिहार्य हैप्रेम नि:शब्द होकर भी,परम आनंद की अनुभूति दे गया। देख कर तुझे,ये यक़ीन हो गयाशब्दहीन होकर भी मेरे,चेहरे की खुशी … Read more

तू आगे बढ़

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ उम्मीद के दामन को थामे,तू ज़िंदगी की जंग लड रही हैतू सुंदर है, कोमल भी पर तू शक्ति स्वरूपा,झुकना तेरे बस में नहीं, बस तू आगे बढ़। ममता का दुलार,स्नेह का यह बंधनजिससे रिश्ते मजबूत होते हैं मन के,झुकना तेरे बस में नहीं, बस तू आगे बढ़। संघर्षों की राह … Read more

दुखों को तुम याद करो ना…

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* मधुर क्षणों की मीठी यादें, साथ सदा तुम रखना।दुखों को अब तुम याद करो ना, आँखें नम न करना॥ रात चाँदनी खिलती है, आसमान पर छा जातीपुलक भाव मन में आते हैं, यादें उनकी आती।खुशियों से दामन को अपने, हर पल ही तुम भरना,मधुर क्षणों की मीठी यादें, साथ सदा … Read more

दर्द सीने में

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दर्द सीने में है जज़्बात का, कैसे रोकूं,सिलसिला है यही हर रात का, कैसे रोकूं। रोज़ आता है ख्यालों में वही चेहरा फिर,एक रेला-सा है ज़ुल्मात का, कैसे रोकूं। दिल सुलगता है मगर होंठ तो खामोश नहीं,ज़ोर मैं अपने ख्यालात का, कैसे रोकूं। हर तरफ़ बिखरी हैं महरूमी व तन्हाई … Read more

धन्य हुई माँ पार्वती

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** तीनों लोक के स्वामी, ओ! दुनिया के पालनहार,पुरुषार्थ के आद्य प्रणेता, त्रिभुवन शिव सृजनकारप्रचंड पराक्रमी शिव शम्भो, रग-रग के ओमकार,तुम-सा श्रेष्ठ कौन हो सकता! दे सकता तुम-सा प्यारधन्य हुई माँ पार्वती, तुम्हें पाकर ओ शम्भो सरकार,ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय शिव शम्भो सरकार…। देवों के तुम देव महादेव, त्रिभुवन महिमा … Read more

उस पार… एक विलक्षण दुनिया

भागचंद ठाकुरकुल्लू (हिमाचल प्रदेश)******************************************** एक विलक्षण दुनिया,मनाली-लेह राजमार्ग पर दिखता है अटल टनल का मनमोहक नज़ारा,इसकी एक झलक पाने के लिए चला आता है जग सारापीर पंजाल श्रृंखला में बने हैं अटल सुरंग के दोनों छोर,एक विलक्षण दुनिया वास करती है रोहतांग के उस ओरसामरिक दृष्टि से सुरंग का निर्माण था बहुत ही ज़रूरी,भारत सरकार … Read more

वन-उपवन लहराए

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** सृष्टि रचयिता हो मस्त मगन,छटा बिखेर सर्वत्र लग्नकण-कण विराट स्वरूप,सृजन करता ध्यान मग्न। ऋतु सर्दी में सहमी धरा,लोहित तृण से झांकीपतझड़ में निज पत्र खोए,किसलय संग तरु खोए। वसुंधरा सर्व-सम्पन्न होकरवन-उपवन लहराए।अद्भुत सा स्वर नाद निकल,धरा ओ अम्बर चूमे। फूल-पत्र संग तरु झूले,बुरांस बसंती फूलेफुलकारी ओढ़नी ओढ़नववधू भू सजीले। शिवरात्रि … Read more

जीवन नश्वर, फिर क्यों अभिमान ?

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:सगण × ८+१… यह जीवन नश्वर है सबका, फिर क्यों करना इस पे अभिमान।जग में जिसने तन धार लिया, उसका तय निश्चित है अवसान।जग की यह रीत पुरातन है, हर जीव बना फिर भी अनजान।भव बन्धन में फ़ँसता रहता, उसको न रहे निज जीवन भान॥ विनती करना उस ईश्वर से, … Read more