संसार है कैसा…!
राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** यह संसार है कैसा,देखते हैं हम जैसाया सोंचते हैं वैसा,संसार है कैसा ? मिला एक किसान से,बताया वह ईमान सेसंसार है कर्म का घर,कर्म से चलता सफ़र। फिर दिखा एक वैज्ञानिक,उसने कहा-भाई रूको तनिकयहाँ केवल विज्ञान का खेला है,खोज आविष्कारों का ही रेला है। अब जैसे ही आगे बढ़ा,सम्मुख पाया … Read more