छा गई वसंत बहार
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** जंगल सजे,जैसे टेसू ने किया श्रृंगारआम के फूल महके,जैसे जंगल के द्वारकोयल कूकी ऐसे,जैसे बज रही शहनाईजंगल द्वार,लगने लगा जैसेछाई हो जमके वसंत बहार। ताड़ी के पेड़ मदमस्त हुए,लटकी मटकियाँलगे जैसे तोरण द्वार।वसंती हवा से सरोबार हुआ,जैसे छा गई मन में वसंत बहार॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई … Read more