दीप धर आलोक का
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** दीप धर आलोक का फिर,सुमन अर्पित,मंद लय हैफिर विकल मेरा हृदय है। क्यों हुए हम विलग तुमसे ?याद कर नम ये नयन हैफिर विकल मेरा हृदय है। टूटता दर्पण दिखा कर,सोचता कोई बहुत हैफिर विकल मेरा हृदय है। गगन के उस पार है क्या ?जानने आकुल ये मन हैफिर विकल मेरा हृदय … Read more