जगन्नाथ दर्शन दे दो

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** दिल करता है जगन्नाथ जी, दरस आपका पा जाऊँ,इतनी हिम्मत दे दो मुझको, कभी उड़ीसा आ पाऊँ। रथ की रस्सी को खींचूँ, और अपना जीवन धन्य करूँ,एक बार तो बुला लो प्रभु जी, तुमसे आज गुहार करूँ। चमत्कार जो सुने तुम्हारे, मुझे चकित कर देते हैं,दरस तुम्हारा करने को प्रभु, मेरे प्राण … Read more

जगन्नाथ जी कृपा करो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** हे! जगन्नाथ जी सब पे कृपा करो,मांगलिक शुभ पलों को सदा ही झरो।जो भी अवगुण लिए है, मनुज अब यहाँ-उनको इस जग के स्वामी, अभी ही हरो॥ हैं उड़ीसा में स्वामी जगन्नाथ जी,जिनकी रथयात्रा धर्म के साथ जी।संग में हैं बहन और बड़े भ्रातृ भी-तीनों करुणा जगतहित लिए हाथ जी॥ कितनी … Read more

खो गया हूँ

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ******************************************** खो गया हूँ मैं संसार में मोह माया के बाजार में,चारों ओर रिश्तों का मेला है-मेले के बीच मन मेरा अकेला है। हँसता हूँ सबसे, हँसाता हूँ सबकोगम को छिपाकर गले लगाता हूँ, दौड़ रहा हूँ हर रिश्ते निभाने में-पर हार रहा हूँ स्वार्थी जमाने में। सबको संभाला अपना समझकरसभी संग चला … Read more

झकझोरते हैं अंतर्द्वंद

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)**************************************** अंतर्द्वंद मेरेझकझोरते हैं…यदा-कदा,मस्तिष्क नसेंचढ़ने लगती हैं…कोमल से भाव कभीशूल-सी प्रतीतिदेते हैं…भावों की अधिकता,जब आकाश छूती है…चित्त पथभ्रमितहोने लगते हैं…अनवरत लिखनेकी चाह,कचोटती है हृदय को…शुद्धता का,आत्मीय चिंतनबाँधे रखता है,विचारों में…बरबस ही,उपजती है कोई रचना..कलित अथवा अकलित…प्रदान कर जाती है,मनस कोगहन आमोद…।जैसे-तृप्त हो जाता हैचातक,स्वाति के मिलन से…॥ परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म … Read more

आ गई बारिश

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** बरसात का पानी, कागज की कश्ती,छपाछप करता पानी, बच्चों की मस्ती। बारिश की झमझम, बूंदों की छम-छम,बड़ी ही लुभावनी, बच्चों की सरगम। कागज की नाव बनाते, पानी में फिर बहाते,जो खुशी चेहरे पर आती, वो अब बनती देखते। पेड़ों पर लटकना, फिर पानी में छपकना,धमाचौकड़ी उनकी, बंदरों-सा फुदकना। बच्चों की शैतानी, याद … Read more

तुम्हें ढूंढती रहती हूँ

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)*************************************** चाँदनी रात में मैं तुम्हें ढूँढती रहती हूँ,नज़र से नज़र बचाकर अपनों से तेरे पास आने कोतड़पती हूँ, मचलती हूँ, मेरा दिल तरसता है,अपनी बाँहों में तुम्हें भर लेने कोमैं ढूँढती हूँ तुम्हें गलियों और राहों में,पर तुम तो बसे हो फलों की खुशबू में और बच्चों की मुस्कान में। कैसे … Read more

इनके जैसा कोई नहीं

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** धरती के भगवान…. है धरती के भगवान चिकित्सक,इनके जैसा कोई नहीं है सहायक। मरने वाले को ये जीवन जो है देते,उनके लिए तो बन जाते समर्थक। अपाहिजों के लिए सहारा बन जाते,बन जाते हैं वो इक नया पथ प्रदर्शक। बेसहारों का एक अच्छा चिकित्सक,नि:स्वार्थ भाव से बन जाते हैं पोषक। समाज में … Read more

कभी देर है न, उन्हें साथ ले लोे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभी देर है न, उन्हें साथ ले लो,गिरे जो पथिक हैं, उन्हें हाथ दे दोजो ठिठके हुए हैं अँधेरों की राहों,उन्हें प्यार का एक विश्वास दे दो। न धन से बड़ा है, न शोहरत का कद है,मनुष्यता ही सदा जीवन का पद हैजो भूखे हैं रोटी, जो प्यासे हैं ममता,उन्हें नेह का मधुर आकाश दे दो। किसी की उदासी … Read more

हक़ीक़त

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)***************************************** झूठ, कपट में खोये हैं,गलत राह के होये हैं। कैसे फूल खिलेंगे अब,जब काँटों को बोये हैं। जिनके पग अनीति पथ पर,वे इक दिन तो रोये हैं। जो दौलत के हैं पीछे,समझो वे तो सोये हैं। भले नहा लो गंगा में,तो भी पाप न धोये हैं। सता रहा जो दुखियों को,वह … Read more

मंजिल की तलाश

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** मंज़िलों की तरफ, बढ़ना है अब हमें,मुश्किलों से बहुत, लड़ना है अब हमें।कैसी भी हो परेशानी, कठिनाई अब-अपनी ज़िद पर शरद अड़ना है अब हमें॥ मंज़िलों की तरफ कूच करना ही है,हर सफलता को अब नित्य वरना ही है।हौसला सँग में होगा, तो हारूँ नहीं-बनके जलधार हमको तो बहना ही है॥ … Read more