सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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दर्द कुछ हैं बड़े गहरे
जो वर्षों तक न भरते हैं,
बना कर घर हृदय के बीच
वे दिल में ही रहते हैं।
जहाँ से क्यों चले जाते
अकेला करके जीवन को,
हँसी अपनी तथा स्पर्श
छोड़ जाते याद करने को।
लोग कहते हैं-भूल जाओ
पुरानी बीती हुई बातों को,
पर नहीं, कुछ यादें होती हैं
आत्मा में उतर जाने को।
ये बरगद की जड़ों-सी
अंतर्मन तक समा जाती हैं,
किसी अनकहे गीत की तरह
निरंतर मन में बस जाती हैं।
कभी सपनों में आ जाया करो,
दिल को समझा जाया करो।
बहुत अकेला है यह मन,
अगन मन की बुझा जाया करो॥