शीश झुकाते जोड़ें हाथ
उर्मिला कुमारी ‘साईप्रीत’कटनी (मध्यप्रदेश )********************************************** अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते हार ना मानी वह रानी थी,खूब लड़ी थी अपने बल पर, बलशाली वह रानी थी…। प्रजा की रक्षा की खातिर दुश्मनों को मजा चखाती थी,जीना हराम कर दिया उसने, छक्के छुड़ाती लड़ती थी…। आन-बान-शान-शौकत से उनसे दुश्मन जलते थे,चुन-चुनकर रानी ने खदेड़ा हथियार छोड़ वह भागे थे…। … Read more