ऋषि सुनाक पर फूहड़ बहस

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* ब्रिटेन में ऋषि सुनाक के प्रधानमंत्री बनने पर भारत में बधाईयों का तांता लगना चाहिए था, लेकिन अफसोस है कि हमारे नेताओं के बीच फूहड़ बहस चल पड़ी है। कांग्रेस के २ प्रमुख नेता (जो काफी पढ़े-लिखे और समझदार हैं) ने बयान दे मारा कि सुनाक जैसे ‘अल्पसंख्यक’ को यदि ब्रिटेन-जैसा कट्टरपंथी … Read more

बेकार आदतें छोड़कर बचें घुटनों के दर्द से

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** “वातशोणितज : शोथो जानुमध्ये महरूज:,ज्ञेयः क्रोष्टक शीर्षस्तु स्थूलः कोष्टकशीर्षवत।”घुटने में वात और रक्त की विकृति से होने वाले जानुगत तीव्र पीड़ायुक्त शोथ (जिससे जनुसन्धि गीदड़ के सिर के समान स्थूल हो जाती है) उसे क्रोष्टुक शीर्ष कहते हैं।जोड़ों में गंभीर दर्द या अन्य रोग पहले बुजुर्गों में देखे जाते थे, लेकिन अब युवा … Read more

वर्तमान में विश्व राजनीतिक गुरु कृष्ण के उद्देश्यों की प्रासंगिकता

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** आज के युग में कृष्ण के उद्देश्यों की सबसे अधिक आवश्यकता व प्रासंगिकता है।जरासंघ ने कितने ही राजाओं को बंदी बनाया हुआ था। श्री कृष्ण ने उन सबको जरासंघ की कैद से मुक्त किया। सभी को ससम्मान उनका राज्याभिषेक करके उनका राज्य लौटाया, जबकि वे चाहते तो उन सभी राज्यों को अपने … Read more

भेदात्मक दृष्टि अपनाता है विकीपीडिया

प्रो. महावीर सरन जैन*************************** भारत २२ परिगणित भाषाओं का देश है, मगर हिन्दी की एकतरफा बोधगम्य उपषाओं पर अध्यारोपित व्यवहारिक हिन्दी के माध्यम से भारत के नागरिक संवाद करते हैं।चीन भी बहुभाषिक देश है। यहाँ गान, मगँग, मिनाम, फुथेमो, मिरबई, वू, केन्टेनीज़ यबए, थूज़ा, तिब्बती, चीनी आदि अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, मगर मंदारिन की … Read more

ब्रिटेन:ऋषि सुनक के लिए चुनौतियाँ

ललित गर्गदिल्ली************************************** भारतीय मूल के ऋषि सुनक नया इतिहास रचते हुए ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री की शपथ ले चुके हैं। यह पहली बार हुआ है, जब कोई भारतीय मूल का व्यक्ति ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बना है। हालांकि, इससे ब्रिटेन पर छाए राजनीतिक और आर्थिक संकट के बादल कितने कम होंगे, यह भविष्य के गर्भ में … Read more

सुखद जीवन का आशीर्वाद दिव्यता की चादर

मुकेश कुमार मोदीबीकानेर (राजस्थान)**************************************** जन्म के पश्चात् हम अपने अभिभावकों से, घर के बड़े-बुजुर्गाें से, बाल्यकाल के मित्रों से, अड़ोस-पड़ोस के लोगों से उनके अनुसरण में गुण व अवगुण ग्रहण करते हुए बड़े होते हैं। माता-पिता व बड़े-बुजुर्गों द्वारा हमें अच्छी और आदरपूर्ण व्यावहारिकता सिखाने का प्रयास भी किया जाता है, साथ ही हर बच्चा … Read more

दीपावली:उपहार का आदान-प्रदान कितना उचित ?

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** रोशनी से जिंदगी…. हम इस त्यौहार पर अपने घर की रंगाई- पुताई करते हैं। इस बहाने घर से फालतू सामान भी निकल जाता है और घर में कोने में जो कीटाणु वगैरह जमा हो जाते हैं, वे भी नष्ट हो जाते हैं।दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और यह … Read more

रोशनी की लहर हैं दीपावली के दीए

ललित गर्गदिल्ली************************************** रोशनी से जिंदगी… दीपावली एक लौकिक पर्व है। फिर भी यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी बने। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूर्च्छा के अंधकार को दूर कर सकते हैं। दीपावली के मौके पर सभी आमतौर से अपने घरों की … Read more

सिंहासन खाली करो कि, हिन्दी और भारतीय भाषाएं आती हैं…

डॉ. मनोहर भण्डारीइंदौर (मध्यप्रदेश)*********************************** जब से चिकित्सा शिक्षा को हिन्दी माध्यम से दिए जाने की घोषणा हुई है, तभी से अभी तक कुल मिलाकर लगभग डेढ़ सौ चिकित्सा शिक्षकों, चिकित्सकों, पत्रकार साथियों और गैर चिकित्सीय विद्वानों तथा विद्यार्थियों ने मुझसे बातचीत में सरकार के इस कदम की आलोचना एवं घोर निन्दा की है, उपहास उड़ाया … Read more

सांसारिक विमुखता द्वारा आत्म स्वरूप की पुनः प्राप्ति

मुकेश कुमार मोदीबीकानेर (राजस्थान)**************************************** गर्भ में पोषित हो रही देह में विराजमान होकर शिशु के रूप में जन्म लेने के पश्चात् आत्मा का संसार की चीजों से, व्यक्तियों से, व्यवस्थाओं से दिन-प्रतिदिन परिचय होता ही रहता है। इन्द्रियों के माध्यम से आत्मा रोज विभिन्न प्रकार के अनुभव अपने अन्तःकरण में संजोती है, किन्तु प्रकृतिजन्य शरीर … Read more