आशिकी खलती रही
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** देखकर अँधियार जग में चाँदनी हँसती रही।साथ मेरे चाँद था वो देख कर जलती रही। चाँद से भी खूबसूरत है मिरा दिलबर हसीं,शिद्दतों से उसके दिल में दुश्मनी पलती रही। आँख से शोले बरसते आग थी दिल में लगी,पर न जाने क्यों हमारे साथ वो चलती रही। जल रहा था दिल … Read more