फिर आओ मोहन…
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** पाप कर्म हर ओर है फैला,झूठ अधर्म से हृदय है मैलाबिछे राह में कितने कंटक,चहुँओर विश्वास का संकटमन में अज्ञानता का अंधेरा,लालच ने किया तेरा-मेराअहंकार रावण-सा खड़ा है,स्वार्थ त्याग से हुआ बड़ा है।घायल हुए सबके तन-मन,एक बार फिर आओ मोहन…॥ मुरली की वो तान कहाँ है,वृंदावन का ध्यान कहाँ हैगोधूलि … Read more