कलरव जिंदगी का

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ कलरव है जिन्दगी का…इन आते-जाते खिसकते लम्हों का,कलरव है मौन काइस गहराते सन्नाटे में,उठती चीख का। कलरव है प्रेम का…इन टूटते बिखरते,रिश्तों का,कलरव है साँसों के स्पन्दन काइन घटती बढ़ती जिन्दगियों का। कलरव है समुद्र का…इसमें आते-जाते ज्वारभाटे काकलरव है पक्षियों का,उनके क्रदन,रुदन,चहचहाहट का। कलरव है दर्द का…इन सिमटे,बिखरे रिश्तों का,कलरव … Read more

मान सरोवर

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** लगे रंग गुलाबी जल में जमघट,राजीव मनवा लुभाये।ताल मध्य खिल कर पंकज दल,हमें हाथ हिला बुलाये॥ घेर खड़ा गिरी चार ओर से,रूप सजाता नीर भोर सेबिना समूह तरु लगते सूने,जल राशि गगन लगे चूमेपार नहीं दिखे रजत वारे।हिमशिला तट में समाये,हमें हाथ हिला बुलाये…॥ वृंद-वृंद तरे हंस हँसिनी,मंद-मंद चले संख संखिनीझुंड-झुंड में … Read more

किसानों को समृद्ध बनाने में बहुत कुछ करना बाकी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष….. अनादिकाल से ही सभी जगह धरती पर कृषि का प्रचलन है,साथ ही उस समय से ही कृषि कार्य करने वाले को कृषक कह कर पुकारने लगे। कालान्तर में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में कृषक को भूमिपुत्र,हलधर,खेतिहर,अन्नदाता के अलावा किसान नाम से भी सम्बोधित किया।सर्वविदित है … Read more

पीड़ा का लें संज्ञान

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष….. उपजाते हैं अन्न को,सबके ये भगवान।इस धरती पर देव है,अपने सभी किसान॥ आज दुर्दशा देख लें, नित्य बहाते नीर,आय नही है क्या करें,कितना सहते पीर।कठिन तपस्या ये करे,होता बचत न धान,इस धरती पर देव है,अपने सभी किसान…॥ फसल लाभ से है विमुख,मिलता उचित न मोल,पीड़ा … Read more

अपना अंदाज बदलो

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** दिलों से जो प्यार करते हैं,वो दिलदार कहलाते हैंखो जाते हैं हम जब कोई,हमें अपना मिल जाता है। न मंजिल है न ठिकाना है,बस किसी के दिल में रहना है।इसलिए तेरे दिल को,अपना घर बनना चाहता हूँ। अब हमें अच्छी दोस्ती,तेरे साथ की करना हैऔर दिल की कहानी को,दिल वालों से खुलकर … Read more

बोल पपीहे और वेग से

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ बोल पपीहे और वेग से,बोल किसी निर्जन वन मेंसुन-सुन तेरे बोल बँधाऊँ,मैं धीरज अपने मन में। बदला बरसे हियरा तरसे,मेरे श्याम न आये रेकाँपूं डर से मैं इस घर से,रह-रह मुझे रुलाये रे।बोल पपीहे तेरी बोली,मीत बने सूनेपन में। बोल-बोल तू पिया-पिया रट,उनको बोल सुना दे रेमेरे श्याम कहां जा छाये,तू ही उन्हें … Read more

अपनों से हो प्यार

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** अपने-अपने हैं सभी,अपनों से हो प्यार।दुनिया की इस भीड़ में,खो मत जाना यार॥खो मत जाना यार,यहाँ धोखा ही पाते।जिसका खाते अन्न,उसी का हैं गुण गाते॥कहे ‘विनायक राज’,देखना मत तुम सपने।स्वार्थ करे इंसान,नहीं हैं कोई अपने॥

सबका साथ निभाएंगे

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ********************************** नव वर्ष विशेष…. नये वर्ष की शुभ बेला पर,सबका साथ निभायेंगे।हुये गिले-शिकवे हैं जो भी,उनको दूर भगायेंगे॥ है इंसान एक बराबर,फिर क्यों पीछे जाते हो।जाति-धर्म का भेद बताकर,छोटी सोंच बनाते हो॥ पढ़ी-लिखी यह सारी पीढ़ी,इक पहचान बनायेंगे।नये वर्ष की शुभ बेला पर,सबका साथ निभायेंगे॥ बैठे रहते सड़क किनारे,वो भी … Read more

मुँहतोड़ जवाब

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* जोकहना है,जोसुनाना है,स्पष्ट कहो!स्पष्ट सुनो!स्पष्ट लिखो!बिखरा पड़ा है समय,चलो! मिलकर समेंट लें। प्रतीक,वबिंब बातेंअक्सरउलझ जाती हैं,स्वछंद धरातल पर मुंडेर बन जाती हैं। विचार-विमर्श,तर्क-वितर्कअब,बहुत हो चुकेक्षमता रखो,मुँह तोड़ जवाब देने की। लाखों लोगों केश्राप,वनिष्प्राणों से,बना देश खंडहर ही रहता हैसुना है,खंडहर!कभी फिर से महल नहीं बनते।सच में,कभी महल नहीं बनते!!

नए साल…तू बता

प्रीति शर्मा `असीम`नालागढ़(हिमाचल प्रदेश)******************************************** नव वर्ष विशेष…. नए साल अब तू ही बता मैं क्या करूं,हैप्पी न्यू ईयरहैप्पी न्यू ईयर कह-कह कर,नए साल आने की खुशी में वही…बरसों पुराना नाटक करूं।नए साल अब तू ही बता मैं क्या करूं… पिछले साल की अनगिनत टूटी हुई उम्मीदों से,मैं फिर से दिल को झूठी तसल्ली देनए साल … Read more