कलरव जिंदगी का
डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ कलरव है जिन्दगी का…इन आते-जाते खिसकते लम्हों का,कलरव है मौन काइस गहराते सन्नाटे में,उठती चीख का। कलरव है प्रेम का…इन टूटते बिखरते,रिश्तों का,कलरव है साँसों के स्पन्दन काइन घटती बढ़ती जिन्दगियों का। कलरव है समुद्र का…इसमें आते-जाते ज्वारभाटे काकलरव है पक्षियों का,उनके क्रदन,रुदन,चहचहाहट का। कलरव है दर्द का…इन सिमटे,बिखरे रिश्तों का,कलरव … Read more