महक हूँ गीली माटी की
अमृता सिंहइंदौर (मध्यप्रदेश)************************************************ हूँ महक गीली मिट्टी की…कभी तेज़ तपिश भी सूरज-सी…भादो की हूँ रिमझिम फुहार भी मैं….तेज़ चमक भी बिजली-सी।शीतल सलोनी छाया भी मैं…हूँ सात सुरों का साथ कभी,कभी पूर्वइया सावन की तो….मीठी-सी धुन गीतों की कभी।हूँ आहट कभी कंपन की…तो कभी हूँ काली छाया भी…नहीं क्या हक़ जीने का मुझे…!या पीछे छोड़ आई … Read more