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मेरे प्रभु राम
श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* मेरे शुभचिंतक प्रभु राम हैं,मेरे पूज्य पिता श्रीराम हैंपूजन करुँगी राम का,भजन करुँ राम काचरण धूली सिर,पर मैं रखूँगीहाथ जोड़विनतीकरुँमैं। जल्दी सिंहासन पर बैठो राम,होगा पूरण सबका काममझधार में पड़ी है अब,नइया हे प्रभु हमारीआप मेरी नैया का,खेवनहारा होकरा दो आप,भवसागरपार हे,राम। मन बेचैन है श्रीराम के दर्शन को,कब जन-जन की … Read more
संसदःपक्ष और विपक्ष का अतिवाद
डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* संसद का यह वर्षाकालीन सत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण होना था लेकिन वह प्रतिदिन निरर्थकता की ओर बढ़ता चला जा रहा है। कोरोना महामारी, बेरोजगारी,अफगान-संकट,भारत-चीन विवाद,जातिय जनगणना आदि कई मुद्दों पर सार्थक संसदीय बहस की उम्मीद थी लेकिन पेगासस जासूसी कांड इस सत्र को ही लील गया है। लगभग २ सप्ताह से दोनों सदनों … Read more
याद करो उन जाँबाजों को
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* याद करो उन जाँबाजों को,भारत माँ की संतानों कोराष्ट्र के उन जलते शोलों को,बगिया के सुंदर फूलों कोजो खिल न सके उजड़ गए,दूर अपनों से बिछड़ गएजाते-जाते देखा न पलट कर,विदा हुए तिरंगे में लिपटकरवो लौटकर कभी न आएंगे,आज हम गीत उन्हीं के गाएंगे…। उम्र में भी वो थे कितने … Read more
वास्तव में अत्यंत निंदनीय
डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)****************************************** मुद्दा-ऑक्सीजन की कमी कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि,महाभारत काल बहुत विकसित रहा। कारण संजय ने अपने राजा को युद्ध की सब घटनाएं नित्य प्रति सुनाई और राजा को लग रहा था कि में स्वयं मैदान में रहकर साक्षात् युद्ध देख रहा हूँ। इसके अलावा धृतराष्ट्र को पूरे राज्य के घटनाक्रम … Read more
अच्छे विद्यालय,अच्छे गुरु और अच्छा स्नेह मिला
सविता धरनदिया(पश्चिम बंगाल)**************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष….. ‘विद्यार्थी’ २ शब्दों के मेल से बना है-विद्या व अर्थी। विद्या का अर्थ हुआ ज्ञान और अर्थी माने चाहने वाला। देश का एक अच्छा नागरिक हम तभी हो सकते हैं,जब हम अपने अध्ययनकाल में अच्छे विद्यार्थी होंगे। ऐसे ही मेरा विद्यार्थी जीवन बहुत अच्छा था। बचपन से … Read more
कब आओगे साजन
नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** घर,आँगन,गलियाँ,चौराहे,सूने-सूने लगते हैं।वापस कब आओगे साजन,राह तुम्हारी तकते हैं॥ चिड़ियाँ फुदकें आँगन में आ,पहले जैसी बात नहीं।खिलें फूल खुशबू भी देते,उसमें वैसी रास नहीं।पवन झकोरे मद्धिम-मद्धिम,बेमन-बेमन बहते हैं,घर,आँगन,गलियाँ,…॥ सूरज रहता है दिनभर पर,ना बोले,ना बतियाये।हाल रात का भी ऐसा है,लगे,अश्क़ अब झलकाये।चाँद,सितारे गुमसुम बैठे,खोये-खोये रहते हैं,घर,आँगन,गलियाँ,…॥ चारों तरफ उदासी पसरी,दूर-दूर तक तनहाई।हूक … Read more
यहीं कहीं कैलाश में
संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** यही कहीं कैलाश मेंआत्म चहक रही मेरी,सावन की बरसात में-मिट्टी महक रही मेरी। प्रीत में शीत नहींजीवन में जीत नहीं,हार जाऊं बन हार मैं-लिपट गले महकूं तेरे। स्पर्श पवन पा रहीतरंग उर समा रही,त्वरित मिलन को देह-नित बहका रही मेरी। महेश हो,मधमहेश होतांडव कारी परमेश हो,त्राहिमाम पापों की-आत्म मांग रही मेरी। आषुतोष,शशांक … Read more
स्वर्ग-नर्क का द्वार यहीं
संजय गुप्ता ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** स्वर्ग सभी को ही चाहिए,करके लाख नारकीय करमदौलत से कोई ना खरीद पाया,जिसने पाला यह भरम,जिसने पाला यह भरम,चाहता है जाना स्वर्ग बार- बारमंदबुद्धि को समझाइए,स्वर्ग-नर्क का यहीं से है द्वार,स्वर्ग-नर्क अलग नहीं है,बसी हुई कोई दूसरी दुनियापापों का फल नर्क है,स्वर्ग चाहिए तो कमाओ पुण्य। स्वर्ग-नर्क तो बस है कल्पना,जीवन … Read more
अपना-पराया
रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ कौन अपना है कौन पराया।कोई ये कभी जान न पाया। मुहँ के सामने मीठी बातें,पीठ पर ख़ंजर चलाया। सुबूत दे तो कैसे दें ख़ुदा,इन झूठों ने मुझे फँसाया। मेरे घर में घुस मुझे ही लूटा,जिस पर फ़र्जन का दिल है आया। अंधा गूंगा बहरा प्यार नहीं जानता,उसे किस नागिन ने है भरमाया। जब … Read more