मेरे गिरधर,मेरे कन्हाई जी
दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** जब भी आवाज दूं चले आना,मेरे गिरधर,मेरे कन्हाई जी।रीत प्रीत की भूल न जाना,जो भक्त-भगवान बनाई जी। तन-मन प्यासा जन्म-जन्म से,दरस को तरसे ये अखियाँ।बोल बोल-के छेड़े है जग,ताने देती है सखियाँ।लाज मेरी भी अब तुम्हारे हाथों,आकर लाज बचाओ जी।जब भी आवाज दूं चले आना,मेरे गिरधर,मेरे कन्हाई जी।रीत प्रीत … Read more