पिता के लिए उकेरी श्रेष्ठ भावना:प्रथम विजेता ममता तिवारी और सविता धर

इंदौर(मप्र)। मातृभाषा हिंदी के सम्मान की दिशा में हिंदीभाषा डॉट कॉम परिवार की तरफ से निरन्तर स्पर्धा का क्रम जारी है। इसी कड़ी में ‘पिता का पसीना,प्रेम और हम’ विषय पर आयोजित स्पर्धा में ममता तिवारी और सविता धर प्रथम विजेता बनीं है। इसी प्रकार क्रमश: एस. के. कपूर एवं सुरेन्द्र सिंह राजपूत ‘हमसफर’ ने … Read more

कुछ ना कहो

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** सुगुनी का विवाह अपने से बड़ी उम्र के आदमी किशना से हो गया था। किशना अच्छा पैसे वाला शख्स था। उसका बहुत पैसा सुगुनी के बाप राम चन्द्र पर उधार था। राम चन्द्र कैसे भी उस पैसे को नहीं चुका पा रहा था। किशना की पहली बीबी चार बच्चों को छोड़ कर … Read more

हम सबका खून एक ही

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* बिहार सरकार के एक मंत्री जमा खान ने अपनी ८०० साल की विरासत को याद किया और खुद की मिसाल पेश करके कहा कि सर संघचालक मोहन भागवत ने जो कहा है,वह बिल्कुल ठीक है। मोहन जी ने पिछले दिनों कहा था कि भारत के हिंदुओं और मुसलमानों का डीएनए एक ही … Read more

तेरे मीठे बोल ही याद आएंगें

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* चार दिन की जिन्दगी फिर अंधेरा पाख है,फिर खत्म कहानी और बचेगा धुंआ राख है।अच्छे कर्मों से ही यादों में रहता है आदमी-तेरे अच्छे बोल व्यवहार से ही बनती साख है॥ कब किससे कैसे बोलना,यह मानना बहुत जरूरी है,इस बुद्धि-कौशल कला को,जानना बहुत जरूरी है।शब्द तीर हैं कमान हैं,देते हैं घाव गहरा … Read more

रस्मों की जकड़ से दूर

ऋचा सिन्हानवी मुंबई(महाराष्ट्र)************************************* ये रस्मों का मकड़ जालआडम्बर से भरपूर,नाम पर जिसके यहाँमानवता होती चकनाचूर। रस्मों के नाम परडूबते उतराते रिश्ते,ख़ामख़ाह ढो रहेकसैले पड़े रिश्ते। रस्मों की नियमावली सेआहत हैं परम्पराएँ,ढूँढ रहीं अस्तित्व अपनाधूमिल हुई दिशाएँ। इन रस्मों को तोड़ करएक आसमान तलाशना है,क़ैद आकांक्षाओं कोमंज़िल तक पहुँचाना है। रस्मों के नाम परबिखरती हैं आशाएँ,कभी … Read more

हमसे मोहब्बत नहीं है

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ किसी को किसी के लिये फुरसत नहीं है।हमें भी बातें करने की तो आदत नहीं है। तन्हाई में गुज़र गये सालों पर साल कई,किसी अपने को हमसे मोहब्बत नहीं है। खून का रिश्ता पराई आग में जल जाता है,आज़कल सच्ची माँ से मार्फ़त नहीं है। माँ ने पाला जिसे कलेजे से लगाकर,माँ को … Read more

प्रेम दीवानी मीरा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** गीतों में मीरा का गायन,वंदन-अभिनंदन है।मीरा थी बस श्याम-दिवानी,जिसका अभिवंदन है॥ धारण कर बैरागी चोला,मंदिर किया बसेराबनकर के बैरागिन जिसने,पाया धवल सबेरा। लगा हुआ जिसके माथे पर,अहसासों का चंदन है,मीरा थी बस श्याम-दिवानी,जिसका अभिवंदन है…॥ बना हलाहल अमिय निमिष में,श्याम-राग रँग लायापहन गेरुआ वसन हर्ष से,जिसने भाव दिखाया। उस मीरा … Read more

जनसंख्या पर रोक करो भाई

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ बढ़ते संख्या रोज,लोग भी बढ़ते जाते।नहीं नियंत्रण होय,तभी संकट है आते॥आबादी को देख,सदा बढ़ती महँगाई।जनसंख्या पर रोक,करो सब मिलकर भाई॥ करे नौकरी आस,बढ़ा के बच्चे सारे।घूमे कागज रोज,लोग किस्मत से हारे॥बेटी-बेटा एक,भेद ना इसमें जानो।जीवन का आधार,सदा दोनों को मानो॥ जनसंख्या पर रोक,करें जल्दी ही जारी।महँगाई की मार,पड़ी है … Read more

करो प्रतीक्षा धीर-वीर बन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** मूल प्रतीक्षा जीवन सुन्दर,सफल सुखद अरमान हृदय हो।आनन्दित पुरुषार्थ सबल मन,मिले कीर्ति सम्मान विजय हो। करें प्रतीक्षा संयम सत्पथ,दशा दिशा अनुकूल जभी हो।तब तक जीएँ शान्ति धीर मन,समय चले प्रतिकूल मनुज हो। अन्धकार फैले हों चहुँ दिक्,रोग शोक अनुताप बहुल हो।करें प्रतीक्षा नित सूर्योदय,आगत शुभ अभिलाष सृजित हो। सभी … Read more

समर्पण

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** १६-१४,पदांत-२२२….. सदा समर्पण सिखलाता है,सच्ची राह चलाता है।कर्म-धर्म के पथ पर चलना,उच्च मार्ग बतलाता है॥ जीवन में उपयोगी दोनों,त्याग-समर्पण होते हैं।प्रेम भाव हैं मन में भरते,सत्पथगामी होते हैं॥विनम्रता सद्भाव सिखाता,कर्म राह दिखलाता है।कर्म-धर्म के पथ पर चलना,उच्च मार्ग बतलाता है॥ सदा समर्पण सिखलाता है,सच्ची राह चलाता है।कर्म-धर्म के पथ पर चलना,उच्च … Read more