ख़ुद को समझाते हैं
डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* बचपन के वो सुनहरे दिन आज भी हमें रूलाते हैं।अब न जाने क्यों लोग हर क़दम पर आज़माते हैं। अदब थी हममें,जो हर किसी की बात सुन लेते थे,दोस्त इसे कमज़ोरी मान हम पर एहसान जताते हैं। जो भी हँस के मिला उसे अपना समझ प्यार किया,बेगाने ही अक्सर रिश्तों … Read more