जल जीवनदायी

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… नदी ताल में कम हो रहा जल,और हम पानी यूँ ही बहा रहे हैं,ग्लेशियर पिघल रहे और समुन्द्र तल यूँ ही बढ़ते ही जा रहे हैं।काट कर सारे वन कांक्रीट के,कई जंगल बसा दिये विकास ने-अनायस ही विनाश की ओर कदम,दुनिया के चले ही जा रहे … Read more

नेता का यही गुण

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* कभी शोला कभी शबनम नेता का यही गुण है,सुबह प्रसाद रात में रम,नेता का यही गुण है।कथन-करनी के अंतर का उदाहरण हैं नेता-पैसे की बरसात झमाझम,नेता का यही गुण है॥ कभी नरम और कभी गरम,नेता का यही गुण है,कब क्यों कैसे आँखें नम,नेता का यही गुण है।नेता खुद नहीं कह पाता कि,आगे … Read more

प्रथम पाती

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* चाहती हूँ फूल बन तुम पे बिखर जाना, चाहती हूँ बादल बन तुम पे बरस जाना। संदेश नवजीवन का सुनाना चाहती हूँ- प्रथम पाती प्रेम की सुनाना चाहती हूँ॥ परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ … Read more

शिद्दत से जियो किरदार को

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* जिन्दगी रोज़ एक नया पन्ना खोल देती है,रोज़ नई चुनौती का करो सामना बोल देती है।दुःख संकट हँसी खुशी सब-कुछ समाया-कभी खुशी-कभी गम का यह झोल देती है॥ कहती है जिंदगी कि रोज़ तुम मौज करो,केवल एक दिन नहीं पूरी उम्र रोज़ करो।मायूसी और आलस्य करते नहीं ऊर्जा निर्माण-खुशी कहीं मिले नहीं … Read more

पतझड़ के पात

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* शाखाओं से विलग होकर भी मुस्कुरा रहे हैं,वियोग सहकर भी पावन प्रीत निभा रहे हैं।पतझड़ के पात हैं या प्रात-मुकुलित-फूल-झर-झर कर धरा का कण-कण सजा रहे हैं॥ दूर तलक स्व सौन्दर्य से प्रेम-पथ बना रहे हैं,प्रेमी हृदयों को सरस मूक निमन्त्रण दे रहे हैं।निराश हृदयों को प्रीत की भाषा सिखा … Read more

अब तक जवान होली है

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* प्रेम का निशान हमारी,पावन होली है,भाईचारे की बोलती जुबान होली है।रंगों की शीतल फुहार है यह होली-हर दिल में घुलता,गुलाल होली है॥ प्यार का बढ़ता कारवां होली है,गिरा दे जो नफरत की,दीवार होली है।होली तो है दिलों से,दिलों का मिलाप-कैसे मिटें दूरियाँ,जवाब इसका होली है॥ गुज़िया,भंग,तरंग नाम,इसका होली है,रंगारंग रंगों का जमीं-आसमाँ … Read more

पावन होली…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’ उदयपुर (राजस्थान)****************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) विशेष… रंगों का पर्व~त्यौहारों का देशछाया है हर्ष। पावन होली~खुशियों से भर देसबकी झोली। एक हो देश~होली भाई चारे कादेती सन्देश। पी कर भंग~कहीं हो नहीं जाएरंग में भंग। उड़ी गुलाल~कायम रहे शांतिन हो धमाल॥ परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि … Read more

राधा आओ

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचना शिल्प: मात्रा भार १४ ओ! राधा आओ प्यारी,निकसो तो महल दुआरी!ले अबीर कान्हा खड़े हैं-सँग में है सखियां सारी!! धूम मची बरसाने में,वेणु बुलाये गाने में!श्याम रंग रंगी राधा-रंग बचती बहाने में!! हरे लाल गुलाल पीली,कोई ले कर रंग नीली!कान्हा की पिचकारी से,भीग गयी श्याम छबीली!! परिचय-ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ … Read more

इंसानियत का हो हमेशा भला

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* खुद पर इतना भी गुमान अच्छा नहीं होता,सौ साल का भी सामान अच्छा नहीं होता।छोटी सी जिंदगी हँस कर गुजार दें-इतना लश्कर तमाम अच्छा नहीं होता॥ तप कर बनो सोना तुम,बस खुद्दार बनो,करते रहो मूल्यांकन जीत के हक़दार बनो।खुद को बदलो तो हालात बदल जायेंगे-प्रसन्न रहो और जिन्दगी के वफ़ादार बनो॥ हर … Read more

नज़र

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ रचना शिल्प:मात्रा भार १८,१९,२१,१९ नज़रों का इशारा जो मिल गया,दिल मेरा बहारों-सा खिल गया।रौशन शमा रही रात रात भर-वो क़यामत थी,रूह से हिल गया॥ क़यामत नज़र जवाब क़रारा था,उनका इकलौता ही सहारा था।हम जीते भला किसके साथ सनम-वो मेरा शबे ग़म का सुकून था॥ ऐसी नज़र से देखा लुट गये हम,इश्क़ की राहों … Read more