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अविरल

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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अविरल गंगा धार है,अविचल हिमगिरि शान!
अविकल बहती नर्मदा,कल-कल नद पहचान!
कल-कल नद पहचान,बहे अविरल सरिताएँ!
चली पिया के पंथ,बनी नदियाँ बनिताएँ!
`शर्मा बाबू लाल`,देख सागर जल हलचल!
अब तो यातायात,बहे सड़कों पर अविरल!

सागर-
जलनिधि तू वारिधि जलधि,जलागार वारीश!
सिंधु अब्धि अंबुधि उदधि,पारावार नदीश!
पारावार नदीश,समन्दर तुम रत्नाकर!
नीरागार समुद्र,पंकनिधि अर्णव सागर!
नीरधि रत्नागार,नीरनिधि कंपति बननिधि!
मत्स्यागार पयोधि,नमन तोयधि हे जलनिधि!
(विशेष-उक्त रचना में `सागर` के २६ पर्यायवाची नाम उपयोग किए गए हैंl)

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl