कुल पृष्ठ दर्शन : 201

You are currently viewing मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँ

मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँ

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

****************************************************

शिक्षक दिवस विशेष………..

सदा मिटाता अंधतमस को,
ज्ञान की ज्योति जलाता हूँ।
देता हूँ संस्कार सभी को,
मैं राह नई दिखलाता हूँ।
सरस्वती का आराधक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

ज्ञान और विनम्रता से ही,
सम्मान जगत में पाता हूँ।
अज्ञानी और निरक्षर को,
मैं अक्षर ज्ञान कराता हूँ।
मैं एक आत्मविचारक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

कर्त्तव्य मार्ग दिखलाने को,
मैं कभी कृष्ण बन जाता हूँ।
राजधर्म का पाठ पढ़ाने,
शर शैय्या को अपनाता हूँ।
मैं मानवता का पालक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

मैं ही सृष्टि का निर्माता,
मैं जगप्रलय का कारक हूँ।
मैं ज्ञान की ज्योति प्रसारक,
मैं ही तम का संहारक हूँ।
मैं मिट्टी का आकारक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

हुए सदा ही नतमस्तक हैं,
विश्वविजेता मेरे आगे।
अज्ञान का तमस हरने को,
सुख अरु चैन सभी हैं त्यागे।
सभी का मार्गविस्तारक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

राजनीति और छल प्रपंच,
मुझे कभी नहीं आता है।
सांसारिक वैभव से मेरा,
रहा नहीं कोई नाता है।
मैं एक सच्चा साधक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

शिक्षा कोई व्यापार नहीं,
इसको सेवा मैंने माना।
त्याग दिए वैभव भी मैंने,
उद्देश्य नहीं है धन पाना।
मैं वागीशा आराधक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

मेरा भारत इस दुनिया में,
विश्वगुरू भी कहलाता है।
ज्ञान की शक्ति से ही तो वह,
सृष्टि में पूजा जाता है।
मैं मातृभूमि परिचारक हूँ,
मैं शिक्षक ज्ञानप्रसारक हूँll

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

Leave a Reply