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‘कोरोना’ काल में संजय कौशिक ने गढ़ा नया ‘विज्ञात शक्ति’ छंद,२०० साहित्यकारों की सहमति

सरगुजा(छत्तीसगढ़)।

‘कोरोना’ काल में नए छंद का आविष्कार हरियाणा समालखा के छंद मर्मज्ञ संजय कौशिक ‘विज्ञात’ ने कर दिखाया है। २०० रचनाकारों की उपस्थिति में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान के मुखारविंद से इस नूतन छंद का ‘विज्ञात शक्ति छंद’ नामकरण किया गया।
इस नवीन छंद को सहर्ष मान्यता देने हेतु ‘कलम की सुगंध’ पटल की मुख्य मंच संचालक अनिता मंदिलवार ‘सपना’ के संचालन में कार्यक्रम रखा गया। मंच पर लगभग २०० रचनाकारों ने उपस्थिति दर्ज कराई। नूतन ‘विज्ञात शक्ति छंद’ नामकरण के अवसर पर विधिवत पंच परमेश्वर विराजमान किए गए। अध्यक्ष श्री चौहान की अध्यक्षता में छंद शाला के प्रबुद्ध छंदकार बाबूलाल शर्मा,इन्द्राणी साहू आदि की विवेचना,समीक्षा व सहमति के आधार पर हिन्दी साहित्य हेतु इस छंद को सहर्ष मान्यता दी गई। संचालक पूजा शर्मा,समीक्षक साखी गोपाल पंडा और मुख्य अतिथि वीरेंद्र सिंह चौहान की विशेष उपस्थिति में बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’, अनिता सुधीर आख्या,बोधन राम निषादराज एवं गीता द्विवेदी सहित संचालक मण्डल का हार्दिक आभार प्रेषित किया गया।
मंच प्रमुख अनिता मंदिलवार ‘सपना’ ने बताया कि, छंद आविष्कारक ‘विज्ञात’ के अनुसार यह सम मात्रिक छंद है,जिसकी मापनी ८/१० है। इसमें ४ पंक्ति ८ चरण लिखे जाते हैं,एवं उत्तम लय के लिए प्रत्येक पंक्ति के अंत में २११,११२,२२ चौकल आदि होता है,जबकि वर्णों की संख्या की बाध्यता नहीं है।
अंत में सभी को धन्यवाद संजय कौशिक ‘विज्ञात’ ने दिया।

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