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अधूरे रिश्ते

ममता तिवारी
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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काव्य संग्रह हम और तुम से..


घूँट में पिलाता रहा हम पीते रहे,
पूरे दिल से अधूरे रिश्ते को जीते रहे!

वहाँ कोई गम न यहाँ कोई आँसू,
दस्तूर से अलग इश्क़ हम करते रहे।

खामोश मिजाजी गजब दिलनशी,
चुप बैठे सामने वो हमें हम सुनते रहे!

कजरे की बातें न लाली का जिक्र,
वो आईना बना और हम सँवरते रहे!

ना रोका कभी ना ही जाने दिया,
वो कलाई पकड़ते हम ठहरते रहे!

मय ना साकी ना प्याला पैमाना,
मदहोश वो रहते हम बहकते रहे!

बारिश ना पानी ना कुछ सीलन,
वो बरसता रहा और हम भीगते रहे!

आतिश ना शोले ना ही शरारे,
वो पिघलता रहा हम सुलगते रहे!

पछुआ पुरवा ना नमकीन हवाएं,
वो रेशम डोर हम पतंग से उड़ते रहे!

आफताब वो मेरा मैं चाँद उनकी,
चमकता रहा और हम बिखरते रहे!

समंदर तूफां ना है कश्ती मांझी,
वो डूबता रहा हम गहरे उतरते रहे!

ग़ज़ल मैं उनकी तरन्नुम वो मेरा,
वो गुनगुनाता रहा है हम पढ़ते रहे!

सावन पतझड़ बसन्त या हो बहार,
मौसम की जानिब न हम बदलते रहे!

ना बुत ना बत्ती सुमिरन ना मनके,
इबादत करे वो सजदे हम झुकते रहे!

वो रूठे ना मुझसे ना मैंने मनाया,
नैन तीर तकरारों पर हम लड़ते रहे!

राह नहीं कोई ना ही कोई मंजिल,
हमसफ़र अनजान राह हम चलते रहे!!

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