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मन से दूर न होय

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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तन से दूरी हो भले,मन से दूर न होय।
तन-मन दोनों स्वस्थ हों,सुखी निरोगी होय॥

मतभेदों को भूलकर,सभी एकजुट होय।
दुश्मन से मिल के लड़ें,आपा कभी न खोय॥

करे अकारण जो मनुज,देवदूत पर वार।
मनुज वे पशु समान हैं,भूल गए संस्कार॥

सुरसा के मुख सा हुआ, ‘कोरोना’ विकराल।
बने सूक्ष्म हनुमान सा,रोके इसकी चाल॥

गाँधी के इस देश में,हिंसा और अधर्म।
वे दानव नर भेष में,करते ऐसा कर्म॥

संकट के इस काल में,शासन और अवाम।
सबजन मिलकर के करें,मानवता हित काम॥

सड़कें गलियां हो गई,सूने अरु बेजार।
होते रहते जो सदा,लोगों से गुलजार॥

कोरोना तो जायगा,रहे न मन के भेद।
आपस में मिल के रहें,होय न कोई खेद॥

सीख हमें दे जायगा,आपद का यह काल।
मानव सभी समान हैं,यही समय की चाल॥

घर में रहकर ही सभी,अनासक्त हो जाय।
संयम अरु सद्भाव से,आत्मभाव को पाय॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

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