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जयति-जयति जय-जय हिंदी

डॉ.शैल चन्द्रा
धमतरी(छत्तीसगढ़)
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हिंदी दिवस विशेष……..

भारत की है गरिमा,संस्कृत की है बेटी,
सरल-सुबोध रस की गंगा इसमें है बहती।
है हमारी राष्ट्रभाषा,यह है हमारी हिंदी,
भारत माँ के माथे ज्यों सुशोभित हो बिंदी॥

जयति-जयति जय-जय हिंदी,
प्रतिपल इसके आँचल तले।
जन एकता के दीप जले,
इसी से हम सबमें भाईचारा पले॥

चहुंओर जन-जन में सुख सन्देश फैले,
ज्ञान-विज्ञान की किरणें फैलाती।
जन-जन के मानस को जगाती,
हर हृदय की है अभिव्यक्ति॥

बन गई सबके जीवन की सूक्ति,
जयति-जयति जय-जय हिंदी।
करें आओ हम इसका परिष्कार,
न हो कहीं भी इसका तिरस्कार॥

अपनी भाषा में बोलें हम,
क्या है यह किसी से कम ?
यह है वैज्ञानिक भाषा,
है इसमें काफी दम॥

चलो बोलें हम हिंदी हरदम,
है सबसे हमारी विनती।
करें विकास इसका,हो जग में गिनती,
जयति-जयति जय-जय हिंदी॥

परिचय-डॉ.शैल चन्द्रा का जन्म १९६६ में ९ अक्टूम्बर को हुआ है। आपका निवास रावण भाठा नगरी(जिला-धमतरी, छतीसगढ़)में है। शिक्षा-एम.ए.,बी.एड., एम.फिल. एवं पी-एच.डी.(हिंदी) है।बड़ी उपलब्धि अब तक ५ किताबें प्रकाशित होना है। विभिन्न कहानी-काव्य संग्रह सहित राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में डॉ.चंद्रा की लघुकथा,कहानी व कविता का निरंतर प्रकाशन हुआ है। सम्मान एवं पुरस्कार में आपको लघु कथा संग्रह ‘विडम्बना’ तथा ‘घर और घोंसला’ के लिए कादम्बरी सम्मान मिला है तो राष्ट्रीय स्तर की लघुकथा प्रतियोगिता में सर्व प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया है।सम्प्रति से आप प्राचार्य (शासकीय शाला,जिला धमतरी) पद पर कार्यरत हैं।

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