Total Views :147

गरीबों के ‘नसीब’ की ‘अ-तालाबंदी’ कैसे होती है साहब…!

तारकेश कुमार ओझा
खड़गपुर(प. बंगाल )

**********************************************************

1’कोरोना’ काल में दुनिया वाकई काफी बदल गई। ‘तालाबंदी’ अब ‘अ-तालाबंदी’ की ओर अग्रसर है, लेकिन इस दुनिया में एक दुनिया ऐसी भी है,जो तालाबंदी और अ-तालाबंदी का कायदे से मतलब नहीं जानती। उसे बस इतना पता है कि लगातार बंदी से उसके जीवन की दुश्वारियां बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस बीमारी से उपजे हालात ने उन्हें ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है,जहां से निकलने का कोई रास्ता फिलहाल उन्हें नहीं सूझ रहा। सबसे बड़ी चुनौती जीविकोपार्जन की है। अपने आस-पास नजर दौड़ाने पर हमें ऐसे ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे,काल क्रम में जिनका छोटा-मोटा रोजगार भी छिन गया।
करीब तीन साल तक माओवादियों की गिरफ्त में छटपटाने वाले जंगल-महल सहित अन्य का हाल भी कुछ ऐसा ही है। वनोपज के सहारे पेट भरने वाले स्थानीय ग्रामीणों की माली हालत तालाबंदी से बेहद बिगड़ चुकी है।

कई दुर्गम वन क्षेत्र के ज्यादातर लोगों का पेट जंगल में मिलने वाले शाल पत्तों से दोना-पत्तल बना कर चलता है।ग्रामीण सुबह उठ कर पत्ते चुनने जंगल जाते हैं। दोपहर लौट कर वे चुने गए पत्तलों को सिलने का काम करते हैं, फिर बंडल बना कर उन्हें बेचते हैं। इससे पहले एक ग्रामीण परिवार को रोज औसतन २०० रुपए की आय हो जाती थी, लेकिन तालाबंदी के बाद से मांग न के बराबर रह जाने से वे अपने उत्पाद औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। इन पत्तलों का उपयोग ज्यादातर सामाजिक समारोह और शादी-उत्सव में होता है,जो तालाबंदी के चलते बंद हैं। इन पत्तलों की पड़ोसी राज्य ओड़िशा में भारी मांग है,लेकिन कोरोना काल में आवागमन ठप रहने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। इस परिस्थिति में आदिवासियों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में स्थानीय लोगों की खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है। कोरोना,तालाबंदीया अ-तालाबंदी का प्रसंग छिड़ने पर मानों वे पूछ रहे हों…-गरीबों के नसीब की अ-तालाबंदी कैसे होती है साहब..!

परिचय-तारकेश कुमार ओझा का नाम खड़गपुर में वरिष्ठ पत्रकार के रुप में जाना जाता है। आपका निवास पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित भगवानपुर (जिला पश्चिम मेदिनीपुर) में है। आपकी लेखन विधा अनुभव आधारित लेख,संस्मरण और सामान्य आलेख है।श्री ओझा का जन्म स्थान प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) हैl पश्चिम बंगाल निवासी श्री ओझा की शिक्षा बी.कॉम. हैl कार्यक्षेत्र में आप पत्रकारिता में होकर उप सम्पादक हैंl आपको मटुकधारी सिंह हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार तथा श्रीमती लीलादेवी पुरस्कार के साथ ही बेस्ट ब्लॉगर के भी कई सम्मान मिल चुके हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl  

Leave a Reply