जल्दी मत करना भाई

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************ जीवन के बगिया की खिलती,कली मसलना मत भाई।बेटे-बेटी के विवाह में,जल्दी मत करना भाईll कुछ लिखने दो,कुछ पढ़ने दो,सम्हल-सम्हल कर पग धरने दो।सूझ-बूझ,जिम्मेदारी को,रग-रग में रमने-बसने दोllबड़े भाग्य से मिली जिंदगी,नष्ट नहीं करना भाई।बेटे-बेटी के विवाह में,जल्दी मत करना भाईll सही-गलत,अन्याय-न्याय की,शिक्षा अभी अधूरी है।घर,परिवार,समाज,राष्ट्र की,सारी समझ अधूरी हैllआधी से पूरी यात्रा … Read more

डॉ. शिवशरण श्रीवास्तव अमल को अतिविशिष्ट सम्मान

बिलासपुर(छत्तीसगढ़)l चिंतक,साहित्यकार, समाजसेवी तथा सर्वाधिक सक्रिय संभ्रांत समाज भारत के साहित्य प्रक़ोष्ठ के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवशरण श्रीवास्तव अमल को संभ्रांत समाज में निरंतर श्रेष्ठ कार्य करनें के परिप्रेक्ष्य में अतिविशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया है। संभ्रांत समाज के संस्थापक एवं विश्व अध्यक्ष विश्व रत्न पं. शीतला प्रसाद त्रिपाठी (एडवोकेट) ने बताया कि, आपका जन्मदिन प्रतिवर्ष … Read more

कन्या भ्रूण हत्या-जघन्य अपराध

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************** कन्या की हत्या से भारी,कोई पाप नहीं होता।पर जालिम को इस करनी में,पश्चाताप नहीं होता॥ बेबस माँ की कोख उजाड़ी,है यह कितना क्रूर कृत्य।दानव या पिशाच ही कोई,कर सकता है यह कुकृत्य कभी-कभी तो मातृशक्ति भी,इस कुकर्म में शामिल है।जाने क्यों ममता की मूरत,यूँ बन जाती जालिम है॥ लड़का-लड़की चाहे जो हो,जन्म … Read more

यह कैसा नव वर्ष!

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************** अकड़े,जकड़े,ठिठुरे,सहमे,दुबके बैठे लोग यहांशीतलहर से व्यथित प्रकृति भी,थर-थर काँपे सकल जहां। रातें सर्द,कुहासा दिन में,कहां-कहीं उत्कर्ष हुआ ?सोचो मेरे देशवासियों,यह कैसा नव वर्ष हुआ। ठहरो,कुछ दिन करो प्रतीक्षा,घड़ी शीघ्र वह आएगीअवनी,अंबर पुलकित होंगे,मस्त पवन मुसकाएगी। रंग बसंती चढ़े दिलों में,फाग कबीरा गाएगा।चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिवस से,नया वर्ष लग जाएगा॥ परिचय-प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी … Read more

हे अटल तुम्हें शत-शत प्रणाम

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************** श्री अटल बिहारी वाजपेई:कवि व्यक्तित्व : स्पर्धा विशेष………. हे महा हृदय,हे जननायक,भव मध्य सिंधु,हे गगन इंदु।हे महाभाग,गौरव हिमगिरि,हे दैन्य द्रवित,हे अमर बिंदुllभारतीयता,अवलंबन,हे ज्ञानवन्त,हे परम संत।हे धर्म परायण,युगदृष्टा,हे गुणातीत,गौरव अनंतllशोधक वेद,पुराण,उपनिषद,शील हृदय,हे अमर अंश।हे पथ प्रवीण,विज्ञान भानु,हे जगवदन,है परमहंसllहे विश्व विधायक,दीन बंधु,हे गुण गायक,श्री राम नाम।हे मानवता के दिव्य पुंज,हे अटल,तुम्हें शत-शत प्रणामll … Read more

पर्यावरण संरक्षण

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************** कल-कल करते,झरते-झरने,कितना मन को भाते हैं।कलरव करते नभ में पक्षी,सुन्दर तान सुनाते हैं॥ कितनी धरा मनोरम लगती,इंद्रधनुष के बनने से,मिट्टी की खुशबू प्रिय लगती,रिमझिम बूँदें गिरने से॥ मस्त पवन के झोंके देखो,कैसे बहते जाते हैं।फूलों के रस को पीने को,कितने भौंरे आते हैं॥ लेकिन धीरे-धीरे यह,मादकता घटती जाती है।पवन-नीर में,खान-पान में,बदबू बढ़ती … Read more

दूर भगाएं इस दहेज शैतान को

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************** ‘श्रेष्ठ दान’ माना जाता था,‘कन्या दान’ समाज में।सुता दान दाता का सुर सम,था सम्मान समाज में॥ पर इसने अभिशाप बनाया,कन्या रत्न,महान को।मार-कूट कर दूर भगाएं,इस दहेज शैतान को॥ देव-दैत्य जैसा अंतर है,मित्रों! दान-दहेज में।जैसा अंतर पड़े दिखाई,भोज और परहेज में॥ ‘दान’ शान्ति देता, ‘दहेज’ तो,पीड़ित करता प्राण को।मार-कूट कर दूर भगाएं,इस दहेज … Read more

दुनिया कितनी बदल रही

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)******************************************** सदी बीस के जाते ही ये,दुनिया कितनी बदल रही है।कहीं सख्त लोहे के जैसी,कहीं मोम-सी पिघल रही हैll सूख गईं कलकल नदियां तो,गिट्टी,मिट्टी,रेत उठा ली।कोमल दिल वालों की नियत,हाय! कितनी बदल रही हैll साड़ी का पहनावा छूटा,माथे की बिंदिया भी छूटी।जींस और टॉप पहनकर,फैशन कितनी उछल रही हैll कदम-कदम पर लूटामारी,छीना-झपटी,छल पसरा … Read more

कैद,रिहाई और आजादी

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)********************************************************* पिंजरे में बंदपक्षी,छटपटाता हैरिहाई के लिए,वह देखता हैपिंजरे की लोहे की पट्टियों की,बीच की जगह सेउन्मुक्त आकाश,औरउड़ते हुए पक्षी। उसके निढाल और बेबस पंखदेते हैं पीड़ा,वह कोसता हैभूल और गलती केउन पलों को,जिसने बख्शी हैउसे कैद,और छीना हैउससेखुला आकाश,लहलहाते खेतधरती और घोंसला। आजादी…आजादी होती हैखुद की मरजी,जहाँ जी चाहेउड़ो…फिरो…घूमो…,पूरा आकाशपूरी धरती,हमारी है। … Read more

समस्याओं के समाधान हेतु करने पड़ेंगे संकल्पित और सुगठित प्रयास

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** पिछले सत्तर साल से देश की जो हालत है,जिस तरह राजनीति में स्वार्थ परस्ती,दलित और मुस्लिम तुष्टिकरण की होड़,भाई-भतीजावाद, जातिवाद का बोलबाला है,जिस तरह नौकरशाही में क्या चपरासी,क्या अधिकारी,क्या सचिव सभी पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहे हैं,जिस तरह न्याय व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं,उसे देख-सुनकर अब … Read more