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फिर जीवन की क्यारी महके

अमल श्रीवास्तव 
बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

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परम पिता परमेश्वर का,
जब ब्रम्ह देव ने ध्यान किया
प्राप्त प्रेरणा से प्रेरित हो,
प्रकृति पुरुष निर्माण किया।

नर-मादा से युक्त सृष्टि में,
सचराचर,जड़,चेतन हैं
यही जगत की रीति-नीति है,
शाश्वत नियम सनातन हैं।

मानव ईश्वर की अनुपम कृति,
सेवक,शिष्य,सहायक हैं
मनु शतरूपा,आदम-हौवा,
के वंशज सब लायक हैं।

नर-नारी जोड़े में रहकर,
सृष्टि चक्र विस्तार करे
यही जगत पालक की इच्छा,
सभी इसे स्वीकार करें।

न्याय दृष्टि में कुदरत की,
नर-नारी सभी बराबर हैं
सबको रहने,जीने,खाने,
के अधिकार बराबर हैं।

किसी वजह से अगर किसी का,
युग्म विखंडित हो जाता
नर,नारी कोई भी हो,
जीवन अभिशापित हो जाता।

इस बिछोह की विरह,व्यथाएं,
कितनी घातक होती है ?
कितना कष्ट,वेदना कितनी ?
कितनी पीड़ा होती है ?

इस पीड़ा को कमतर करने,
पुनर्विवाह विधान बना
फिर जीवन की क्यारी महके,
पावन नियम महान बना।

पर धीरे-धीरे समाज की,
रीति-नीति में धुंध पड़ी
नर-नारी के बीच विषमता,
भेद-भाव की नींव पड़ी।

पुनर्विवाह हुए पुरूषों के,
महिलाओं को अलग किया
रूढ़िवादिता-परम्परा से,
मातृ शक्ति को बांध दिया।

इससे विधवा की हालत क्या ?
होती बात न कहने की
जिस पर बीती वही जानता,
सीमा टूटी सहने की।

क्या विधवा को अन्य नारियों,
जैसा जीवन नहीं मिले ?
पुत्री,भगिनी,पत्नी,माता,
की पदवी क्या नहीं मिले ?

बहुत हो गया नृत्य अशिव का,
अब शिवत्व को अपनाओ
छोड़ रूढ़ियां,सदविवेक का,
निर्णय ले आगे आओ।

छोड़ो अब इस नासमझी को,
जागो नारी कल्याणी।
परिवर्तन के स्वर में भर दो,
गौरव-गरिमा की वाणी।

गलत प्रथाएं,अंध बेड़ियां,
छद्म रिवाज दूर करो
वैमनुष्यता के पहाड़ को,
संकल्पों से चूर करो।

तुम्हीं द्रोपदी,तुम्हीं अहिल्या,
कुंती,तारा भी तुम हो
कालीमती,बसन्ती,रोमा,
मरियम,सत्यवती तुम हो।

नारी श्रद्धा है शुचिता है,
स्नेह मूर्ति सत धारी है
उसे करो मत विमुख प्यार से,
नव-जीवन संचारी है।

विधवा को भी अन्य नारियों,
जैसा जीने का हक है।
सुता,बहन,सहधर्मिणि,जननी,
सब कहलाने का हक है॥

परिचय-प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी और समाजसेवी `एस्ट्रो अमल` का वास्तविक नाम डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव हैL `अमल` इनका उप नाम है,जो साहित्यकार मित्रों ने दिया हैL जन्म म.प्र. के कटनी जिले के ग्राम करेला में हुआ हैL गणित विषय से बी.एस-सी.करने के बाद ३ विषयों (हिंदी,संस्कृत,राजनीति शास्त्र)में एम.ए. किया हैL आपने रामायण विशारद की भी उपाधि गीता प्रेस से प्राप्त की है,तथा दिल्ली से पत्रकारिता एवं आलेख संरचना का प्रशिक्षण भी लिया हैL भारतीय संगीत में भी आपकी रूचि है,तथा प्रयाग संगीत समिति से संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया हैL इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स मुंबई द्वारा आयोजित परीक्षा `सीएआईआईबी` भी उत्तीर्ण की है। ज्योतिष में पी-एच.डी (स्वर्ण पदक)प्राप्त की हैL शतरंज के अच्छे खिलाड़ी `अमल` विभिन्न कवि सम्मलेनों,गोष्ठियों आदि में भाग लेते रहते हैंL मंच संचालन में महारथी अमल की लेखन विधा-गद्य एवं पद्य हैL देश की नामी पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैंL रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों से भी हो चुका हैL आप विभिन्न धार्मिक,सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हैंL आप अखिल विश्व गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। बचपन से प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कृत होते रहे हैं,परन्तु महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रथम काव्य संकलन ‘अंगारों की चुनौती’ का म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा प्रकाशन एवं प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा द्वारा उसका विमोचन एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा सम्मानित किया जाना है। देश की विभिन्न सामाजिक और साहित्यक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त आपको सम्मानों की संख्या शतक से भी ज्यादा है। आप बैंक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. अमल वर्तमान में बिलासपुर (छग) में रहकर ज्योतिष,साहित्य एवं अन्य माध्यमों से समाजसेवा कर रहे हैं। लेखन आपका शौक है।