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पगडंडी

अलका जैन
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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आशियाने से मंजिल तलक कोई रास्ता नहीं होता यार,
कोई मील का पत्थर नजर नहीं आता बहुत खोजा
कोई रास्ता बताने वाला गाइड नहीं होता,
कोई नक्शा नहीं पहुंचा सकता मंजिल पर।
कोई कारवां साथ नहीं चलता मंजिल तलक हाय,
साथ होती है तो परेशानी बेचैनी और तन्हाइयाँ
सफर मंजिल तलक बहुत काँटों भरा होता यार,
उस पर थकना मना,रुक ना ,चल चला चल।
दुनिया तुझ पर हँसती रहती पागल पुकारा करती,
फिर भी पैर चलाने पड़ते हैं यार
कदम पर कदम बढ़ा पगडंडी बना,
खुद अपने पाँव से चल कर पगडंडी बना।
पगडंडी बना खुद के पसीने से यार दोस्त,
सूझ-बूझ रखनी पड़ती है अपने समीप।
तब जा पगडंडी बनती है यारों,मंजिल मिलती,
दोस्त,पंगडंडी बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं॥

परिचय-अलका जैन का निवास इंदौर(मध्यप्रदेश) में हैL इनकी जन्म तिथि ८ अक्तूबर १९५७ और जन्म स्थान धार(मप्र) हैL स्थाई रूप से शहर इंदौर में सी बसी हुई अलका जैन का कार्यक्षेत्र भी इंदौर ही हैL आप सामाजिक गतिविधियों के अन्तरगत विधवा विवाह करवाने,हास्य-कवि सम्मेलन,नृत्य कला आदि में सक्रिय रहती हैंL आप काव्य सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैंL १९८० से सतत लिखने में सक्रिय अलका जैन को हिन्दी भाषा का ज्ञान हैL प्रकाशन में उपन्यास-पामेला है तो रचनाओं का प्रकाशन लेख,ग़ज़ल,गीत,कहानी आदि के रूप में पत्र पत्रिकाओं में हुआ हैL इनके खाते में सम्मान के रूप में श्रीलाल शुक्ल स्मारक राष्ट्रीय संगोष्ठी समिति(हैदराबाद) से मान सहित मालवा रत्न, गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड और विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मान आदि हैL इनकी विशेष उपलब्धि हास्य का पुरस्कार मिलना हैL लेखनी का उद्देश्य-समय का सदुपयोग करना हैL प्रेरणा -कबीर दास जी हैंL रूचि नृत्य,सत्संग,फैशन,मुशायरे में शिरकत और लेखन हैL

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