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वो ख़त

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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अब वो ज़माने कहाँ रहे ?
जब इंतज़ार रहता था
डाकिये का बेसब्री से,
उसकी साइकिल की घण्टी
सुनकर धड़कता था दिल,
कि लाया होगा
वो महबूब का ख़त।
क्या लिखा होगा ?
सोचकर घबराते थे,
पाकर उनका ख़त
हो जाते थे
मदहोश से हम।
धड़कते दिल से
जब खोलते थे ख़त,
चन्द पंखुड़ियां
ग़ुलाब की,
बिखर जाती थी
दामन पर,
और महक जाता था
पूरा वजूद।
एक-एक हर्फ़ में,
उसका अक़्स
नज़र आता था,
एक बार नहीं
कई-कई बार,
पढ़ा करती थी
फिर भी,
दिल नहीं भरता।
एक तड़प,
एक कसक
जगाते थे दिल में
वो ख़त,
ग़ुलाबी ख़ुशबू भरे
वो ख़त,
आज भी
सम्भाले रखे हैं मैंने।
फूल सूख गए हैं
पर अहसास,
आज भी महकते हैं॥

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।

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