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अब दुनिया भरोसे लायक नहीं रही, क्योंकि…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’
सोलन (हिमाचल प्रदेश)
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सतरंगी दुनिया-२९…

वास्कोडिगामा अगर शादी-शुदा होता तो को कभी भी भारत की खोज नहीं कर पाता, क्योंकि कहां जा रहे हो ? कहाँ से आ रहे हो ? किसके साथ जा रहे हो ? कब वापस आओगे ? मुझे भी साथ ले चलो। मेरे लिए वहाँ से क्या लाओगे ? ये सब सवाल पूछने वाली पत्नी उसके पास नहीं थी। कभी साथ बैठोगे तो अपने दर्द बताएंगे, यूँ फोन से पूछोगे तो खैरियत ही बताएंगे। अब दुनिया भरोसे लायक नहीं रही, क्योंकि लोग अब कसम खाकर भी झूठ बोलते हैं। उम्र से पहले ही बड़े हो जाते हैं वो बेटे, जिन्हें बाप से दौलत नहीं, बल्कि जिम्मेदारियाँ मिलती हैं। आजकल नींद भी बदल गई है, अब सपने नहीं आते। अब तो थकान सुलाती है, और जिम्मेदारियाँ उठाती है। मैं वो समझदार हूँ, जिसे पता है कि मुझे किसने, कब और कितना बेवकू‌फ बनाया था।
  भारत में सिर्फ १ प्रतिशत लड़कियाँ क्रिकेट, टैनिस, हॉकी और बैडमिंटन जैसे खेल खेलती है, और बाकी ९९ प्रतिशत लड़‌कियाँ पत्नी बनकर अपने पति की ज़िंदगी से खेलती है। पत्नी और पति का झगड़ा हो गया तो पति आकाश की तरफ देखकर बोला- है भगवान! मैं इस जीवन से तंग आ गया हूँ, मुझे इस दुनिया से उठा लो। तभी पत्नी बोली- नहीं भगवान, मेरे पति से पहले मुझे उठा लो। पति बोला-ठीक है प्रभु आप मेरी छोड़ो, पहले इसकी सुन लो। खामोशी को किसी की कमजोरी मत समझिए, बल्कि उसका बड़प्पन समझिए, क्योंकि जिसको सहना आता है,  उसका कहना भी आता है। अजीब है दुनिया, यहाँ जिसकी इज्जत करते हैं, वो हमें मजबूर समझते हैं और हम जिससे बहुत प्यार करते हैं, वो हमें बेवकूफ समझता है।
    त्याग वहाँ करो, जहाँ कद्र हो, दोपहर में दीया जलाने से अंधकार नहीं; दीए का वजूद खत्म होता है। पत्नी ने पति से कहा- मैं तुम्हें पहले अच्छी खबर सुनाऊँ या बुरी खबर। पति ने कहा-एक ही वाक्य में दोनों सुना दो। पत्नी ने कहा- मैं और पड़ोसन कल एकसाथ मायके जा रहे हैं। गरीब और अमीर के खाना खाने के वक़्त में अंतर रहता है।अमीर उस वक़्त भोजन करता है, जब उसको भूख लगती है और गरीब उस वक़्त भोजन करता है, जब उसको खाना मिलता है।
 हिंदी के मास्टर जी ने बच्चे से प्रश्न पूछा कि कविता और निबंध में क्या अंतर होता है ? लड़के ने उत्तर दिया-प्रेमिका के मुँह से निकला एक शब्द भी कविता होता है और पत्नी का एक शब्द निबंध समान होता है।  उत्तर सुनकर मास्टर जी ने उस बच्चे को क्लास का मानीटर बना बना दिया।
   आज मैंने अपने साले से बोला- तेरी बहिन मुझसे बहुत लड़‌ती है तो साले ने हँसकर ‌जवाब दिया-हमसे भी लड़ती थी, तभी तो शादी करवाई। चाईना में टूथ ब्रश १ हफ्ते में बदल लेते हैं, ब्रिटिश में १ महीने, अमेरिकन ३ महीने, पर इंडिया में तो टूथ ब्रश कभी रिटायर ही नहीं होfता है। सबसे पहले दाँत साफ करने के काम आता है, फिर हेयर कलर के काम में आता है। उसके बाद मशीन की सफाई में काम आता है और उसके बाल गिर जाते हैं तो वो पाजामे में नाड़ा‌ डालने के काम आता है। पति-पत्नी साईकल के २ पहिए होते हैं, उसमें अगर पड़ोसिन भी शामिल हो जाती है, तो वो रिक्शा बन जाता है।
   धरती पर मनुष्य एक ऐसा जीव है, जो पैसे कमाता है, फिर भी उसका पेट नहीं भरता है। बाकी कोई भी जीव पैसा नहीं कमाता है, फिर भी कोई भूखा नहीं सोता है।     आज भैंस बोल रही थी, कि दूध तो मेरा पीते हो, पर माँ गाय को कहते हो। अगर माँ नहीं कह सकते, तो मौसी ही कहो।
 किसी चीज या इंसान को लात मारना हमारी संस्कृति का हिस्सा, नहीं है, इसलिए भारत फुटबॉल का वर्ल्ड चैम्पियन नहीं है, लेकिन जब एक-दूसरे की टांग खींचने की बात आती है, तो हम उसमें एक्सपर्ट हैं इसलिए भारत कबड्डी में वर्ल्ड चैंपियन है। दुनिया उन्हीं से खैरियत पूछती है, जो लोग पहले से ही खुश हैं। जो लोग तकलीफ़ में होते हैं, उनके तो नंबर तक खो जाते हैं।
कौन कहता है कि मैं मौत आने के बाद मर जाऊँगा,
मैं तो आत्मा हूँ, परमात्मा में समा जाऊँगा।

परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई पता हिमाचल प्रदेश ही है। सिंधी,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले डॉ. मोहन ने बीएससी सहित आर.एम.पी.,एन. डी.,बी.ई.एम.एस., एम.ए., एल.एल.बी.,सी. एच.आर.,सी.ए.एफ.ई. तथा एम.पी.ए. की शिक्षा भी प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र में दवा व्यवसायी ‘भारतीय’ सामाजिक गतिविधि में सिंधी भाषा-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रचार करने सहित थैलेसीमिया बीमारी के प्रति समाज में जागृति फैलाते हैं। इनकी लेखन विधा-क्षणिका, व्यंग्य लेख एवं ग़ज़ल है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। ‘उजाले की ओर’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित है। आपको राजस्थान से ‘काव्य कलपज्ञ’,उ.प्र. द्वारा ‘हिन्दी भूषण श्री’ की उपाधि एवं हि.प्र. से ‘सुमेधा श्री २०१९’ सम्मान दिया गया है। विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अध्यक्ष (सिंधुडी संस्था)होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य का सृजन करना है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणापुंज-प्रो. सत्यनारायण अग्रवाल हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले,हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को हम हिंदी भाषा का ज्ञान दें, ताकि हिंदी भाषा का समुचित विकास हो सके |