पटना (बिहार)।
कविता में चेतना का होना आवश्यक है। बिना चेतना के कविता प्रभावहीन होकर रह जाती है।
कवि सिद्धेश्वर के संयोजन व संचालन में मंडला (मप्र) के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शरद नारायण खरे ने अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। अवसर रहा डॉ. अनुज प्रभात के प्रभार में आयोजित कवि सम्मेलन का, जिसमें सिद्धेश्वर, विज्ञान व्रत, नंद कुमार आदित्य व इंदु उपाध्याय आदि शामिल हुए।
सिद्धेश्वर ने प्रारम्भ में अनेक श्रेष्ठ कृतियों के रचयिता प्रो. खरे का परिचय प्रस्तुत करते हुए उन्हें राष्ट्रीयता का कवि निरूपित किया। प्रो. खरे ने संयोजक के आमंत्रण पर २ बेहतरीन गीत तरन्नुम में पेश किए- “दिल छोटे, पर मकाँ है बड़े, सारे भाई न्यारे। अपने तक सीमित हैं सारे, नहीं परस्पर प्यारे॥”
शामिल सभी रचनाकारों व संयोजक ने भी श्रेष्ठ कविता का पाठ किया, जिसकी त्वरित व सार्थक समीक्षा प्रो. खरे ने की।
आभार प्रदर्शन अनुज प्रभात ने किया।