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कैसा ये इंसान ?

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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सिसकती मानवता,
दम तोड़ती संवेदनाएं
हृदय हीन मानव,
इन्हें कैसे इंसान कहें ?

आँखों में हवस,
दिल में हैवानियत
दरिंदगी का आलम,
इन्हें कैसे इंसान कहें ?

पहचान इंसान की इंसानियत,
मानव की मानवता से,
ये भी जो भूल बैठा आज,
इन्हें कैसे इंसान कहें ?

जानवर अवाक हैं,
आँखों में प्रश्न हैं।
क्या अंतर है हम दोनों में,
इन्हें कैसे इंसान कहें ??