दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)…
कुछ रिश्ते ईश्वर नहीं,
हम स्वयं बनाते हैं
ऐसा ही प्यार-सा,
रिश्ता है दोस्ती का।
न खून का कोई बंधन,
न रिश्तों की कोई डोर
फिर भी मन में बस जाते हैं,
अपनों से बढ़कर हो जाते हैं।
धूप में बनकर छाँव संग चलते,
आँखों के आँसू पढ़ लेते
समय बदलता राह बदलती,
पर भाव कभी न उनके बदलते।
अनमोल होता है यह रिश्ता,
यह ईश्वर की सुंदर सौगात।
खुशी के पल या घड़ी हो दु:ख की,
देते हैं दोस्त सदा ही साथ॥