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पितृ-योग-संगीत त्रिवेणी से आलोकित हुई कल्पकथा गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)।

हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा विश्व पितृ दिवस, विश्व योग दिवस एवं विश्व संगीत दिवस को समर्पित विशेष २५४वीं साप्ताहिक आभासी
काव्यगोष्ठी आयोजित की गई।
अध्यक्षता पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’ ने की। मुख्य अतिथि कु. अलका शर्मा की प्रेरक उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
   संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारम्भ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, श्रीगणेश वंदना एवं माँ सरस्वती वंदना की सुमधुर प्रस्तुति से हुआ।
    गोष्ठी में प्रेमलता कुमारी पुष्पेश, मणिका वर्मा, रमापति मौर्य, ज्योति प्यासी, डॉ. राजेश तिवारी ‘मक्खन’, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, कु. अलका शर्मा, शैली त्रिपाठी, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, सांद्रा लुटावन गणेश, बिनोद कुमार पाण्डेय, हेमचंद्र सकलानी, राजेश्वरी बाजपेई, रमेश चंद्रा गौतम, डॉ. शशि जायसवाल, संध्या श्रीवास्तव ‘साँझ’, प्रमोद पटले,विजय रघुनाथराव डांगे, संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा तथा पवनेश मिश्र ने उक्त दिवस की भावभूमि पर आधारित उत्कृष्ट, भावगर्भित एवं ओजस्वी काव्य-रचनाओं का पाठ किया।
   आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा अजमेर प्रबुद्ध साहित्यकार एवं विजय कुमार शर्मा द्वारा गोष्ठी में सहभागी सभी सनातन प्रेमी जनों को श्रीमद्भागवत कथा में सीधे प्रसारण द्वारा जोड़ना।
    कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में सामूहिक राष्ट्रगीत-गायन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रभक्ति की पावन भावना से सम्पूर्ण वातावरण ओत-प्रोत हो उठा।
प्रभावपूर्ण संचालन पवनेश मिश्र ने किया। राधाश्री शर्मा ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, समस्त सहभागी साहित्यकारों, आमंत्रित अतिथियों एवं दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित किया।