पटना (बिहार)।
सुरेंद्र जी की रचनाएँ एक समर्थ रचनाकार की भाँति समाज के मन को झकझोरती हैं एवं संवेदनाओं के तल को स्पर्श करते हुए प्रश्न भी करती है और उनके उत्तर भी तलाशती है। लघुकथा के क्षेत्र में उनकी सशक्त पहचान है, किंतु उनकी कविताएँ भी समान रूप से प्रभावशाली, अर्थगर्भित और संवेदनाशील है।
यह बात वरिष्ठ साहित्यकार सिद्धेश्वर जी ने स्वागत भाषण के पश्चात साहित्यकार सुरेंद्र अरोड़ा की कविताओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए कही। अवसर रहा आभासी माध्यम से आयोजित कवि गोष्ठी व सम्मेलन का, जिसका माँ शारदा की स्तुति के साथ शुभारंभ हुआ। गोष्ठी संयोजक सिद्धेश्वर के मार्गदर्शन में इसकी अध्यक्षता साहिबाबाद निवासी लघुकथाकार सुरेंद्र कुमार अरोड़ा ने की।
गोष्ठी में रचनाकारों ने उत्कृष्ट गीतों, ग़ज़लों एवं छंदमुक्त रचनाओं से वातावरण को कवित्वमय बना दिया। सुश्री अनिता पांडा, ऋचा वर्मा, दिव्यांजलि सोनी, राजप्रिया रानी तथा श्री अरोड़ा सहित अनेक साहित्यकारों की प्रस्तुतियाँ श्रोताओं को भाव-विभोर कर गईं।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. अनुज प्रभात ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया।