अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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‘विश्व भाई दिवस’ विशेष…
सिर्फ रिश्तों का नाम नहीं है ‘भाई’,
घर की धड़कन का दूसरा धाम है ‘भाई’
जब भी गिरता हूँ, हाथ बढ़ाता है ‘भाई’,
खुद भूखा रहकर भी मुझे खिलाता है ‘भाई।’
मेरी हर जीत में सबसे ज़्यादा हँसता है ‘भाई’,
दर्द छुपाकर भी मेरे संग चलता है ‘भाई’
माँ की ममता, पिता का विश्वास लगे ‘भाई’,
सूने आँगन में जैसे मधुमास लगे ‘भाई।’
दुनिया चाहे लाख बदल जाए भाई,
पर ऐसा अपना कोई ख़ास नहीं ‘भाई।’
संकट की हर राह में दीवार बन जाता है ‘भाई’,
कड़ी मजबूत प्रेम की, परिवार बन जाता है ‘भाई॥’