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अन्नदाता जीवन का दूजा नाम

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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मेरे देश के श्रमजीवी किसान,
अन्नदाता जीवन का दूजा नाम
करे उद्यम उदर पूर्ति संसार की,
हम उतार न पाएं उनका एहसान।

दिन रात सर्दी गर्मी धूप बरसात,
जिनकी मित्रता प्रकृति से पहचान
धरती माँ के लायक बेटा बन कर,
पाते धरती से अथक धन वरदान।

अन्नदानी सच्चे जन सेवक महान,
कृषक चुराए न काम से कभी प्रान
आपस में मिल सुख-दु:ख न्याय अन्याय,
बुद्धि युक्ति से यह करते समाधान।

मेरे देश के कुछ नाम के किसान,
अब बन गए कुछ महा पहलवान
खेतों में बोते हैं अब राजनीति,
राजनीति बोते सरसो गेहूँ धान।

ट्रैक्टर दौड़ा तोड़ते सड़क मकान,
खाते टेंट में छक-छक कर पकवान।
हक लिए लड़ो मगर बन्धुजन सुन बात,
बस अब न करना जन को हलाकान॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।