संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)…
मेरी गोद में खेला तू, मैंने छाँव दी, पानी दिया,
तेरी साँस के लिए मैंने जंगल, नदी, हवा दिया
आज तू बड़ा हो गया, तो मुझे ही काट रहा है,
मेरा सीना चीरकर विकास की बात कर रहा है।
प्लास्टिक की चादर ओढ़ा दी,
धुएं का कंबल डाल दिया
मैंने हरियाली दी थी तुझे,
तूने कांक्रीट का जंगल बना दिया।
ग्लेशियर पिघल रहे हैं मेरे,
समंदर चिल्ला रहा है
तेरी धरती माँ तड़प रही है,
और तू ‘ए.सी.’ चला रहा है।
एक पेड़ लगा दे बेटा,
बस एक पेड़ लगा दे
तेरी गलती मैं सह लूंगी,
बस अब मुझे बचा ले।
कहता है ना तू ?
असुरक्षित को रोक दो
तो अपनी धरती माँ को,
असुरक्षित मत होने दे
इसे भी रोक, इसे भी बचा ले।
आज ‘पर्यावरण दिवस’ है,
कसम खा ले मेरे लाल
प्लास्टिक कम, पेड़ ज्यादा,
पानी का रख ख्याल।
मैं माँ हूँ तेरी, तू मेरा बेटा,
ये रिश्ता पुराना है
ये तेरी माँ की है पुकार।
अगर मैं बच गयी तो तू बचेगा,
वरना तय है दोनों का बर्बाद होना॥