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‘परफेक्ट बहू’ का भूत

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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राधिका की तबियत खराब थी, इसलिए निशा अपनी सहेली का हाल-चाल लेने आई थी। राधिका उससे फोन पर अपनी बहू नैना की बहुत तारीफ किया करती थी।हर समय यही कहती, कि मेरी बहू तो परफेक्ट बहू है।
जब नीरज की शादी हुई थी, तब वह इंडिया में नहीं थी। अब तो उसकी शादी को लगभग ६ महीने हो चुके थे। निशा की खासियत थी, कि वह किसी की तारीफ बर्दाश्त नहीं कर पाती थी। इसलिए वह जब से आई थी, तब से उससे मिलने को बेचैन थी।
    राधिका की बीमारी का तो बहाना था, उन्होंने तो कमर कस ली थी कि आज बहू नैना से मिल कर उसका इंटरव्यू लेकर देखती हूँ, कि वह कितने पानी में है।
उनके कॉल बेल बजाते ही नैना ने दरवाजा खोला और तुरंत उनका पैर छूकर अभिवादन किया। टी-शर्ट और लोअर में नैना को देखते ही उनको तो अपनी किटी फ्रेंड्स के साथ गॉसिप का एक जबर्दस्त टॉपिक मिल चुका था।
“आंटी, आप ठंडा लेंगीं या गरम।”
“अरे, कुछ नहीं बहू तुम परेशान मत हो, मैं तो राधिका का हाल-चाल लेने आई थी।”
“मैं अब ठीक हूँ, वायरल था, लेकिन बुखार उतरने में ३-४ दिन लग गए। अब तो कमजोरी रह गई है, खाना-पीना सही से होने लगेगा तो जल्दी से ठीक हो जाऊँगीं।
तुम बताओ वहाँ खूब मस्ती की ना।”
“हाँ, मैंने तो वहाँ खूब मजे किए, लेकिन तुमने यह क्या किया ? अपनी बहू को इतनी आजादी दे रखी है। यही है तुम्हारी परफेक्ट बहू ?”
  तभी नैना गर्मा-गरम पकौड़े के साथ चाय और राधिका के लिए सूप लेकर आई। निशा एकदम चुप हो गई थी।
उन्होंने पकौड़े और चाय का आनंद लिया एवं राधिका को बिना माँगे सलाह दे डाली।
“बहू तो बहू की तरह ही अच्छी लगती है, न हाथ में चूड़ी, न माथे पर बिंदी और न तो माँग में सिंदूर।
मेरी बहू को तो मैं कह दूँगीं, कि मेरे घर में तो बहू की तरह से ही रहना होगा। आँगन में बहू की पायल और चूड़ियाँ न बजें तो घर में काहे की रौनक…!”
“निशा अब समय बदल गया है। अब हम लोगों को अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। हम सभी को बेटी-बहू को एक नजर से देखने की जरूरत है।”
निशा अपने बेटे नवल के लिए बहुत दिनों से लड़की ढूँढ रहीं थी, लेकिन वह किसी लड़की को पसंद नहीं कर पा रही थी। तभी एक दिन उनका बेटा नित्या नाम की लड़की को कोर्ट मैरिज करके घर ले आया। अब तो निशा ने अपनी इज्जत बचाने के लिए नित्या को खूब साड़ी-जेवर पहना कर रिसेप्शन करके सबके सामने ‘परफेक्ट बहू’ कह कर पेश किया। निशा कुछ दिन तक तो बहू की बहुत तारीफ करती रही, फिर उन्हें अपने भाई के यहाँ कुछ दिन के लिए जाना पड़ गया।
निशा वहाँ १५ दिन के लिए गई थी, लेकिन वह एक हफ्ते में ही वहाँ से लौट कर बहू को सरप्राइज देने के लिए लौट कर आ गई थी।
उन्होंने अपने घर की खुशी-खुशी घंटी बजा दी। बहू नित्या ने  स्लीवलेस टॉप और शॉर्ट्स में दरवाजा खोला तो दोनों ही एक दूसरे को देख हक्की-बक्की हो गईं थी।
“कौन है स्वीटहार्ट ?”
“मम्मी जी।”
अंदर से आती कहकहों की मिली- जुली आवाज उनके कानों में गूँज रही थी। नित्या अपने दोस्तों के पास जाकर कर बैठकर ठहाके लगाने लगी थी।
वह चुपचाप सिर झुका कर अपने कमरे की तरफ चली गईं। ‘परफेक्ट बहू’ को इस रूप में देख उनकी जुबान तालू से चिपक गई थी। उनका परफेक्ट बहू का भूत उतर चुका था।