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आधुनिकता…हम बदल गए!

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ 
मनावर(मध्यप्रदेश)
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इशारों की रंगत खो क्यूँ गई,
चूड़ियों की खनक
और खांसी के इशारे को
शायद मोबाइल खा गया।

घूँघट की ओट से निहारना,
ठंडी हवाओं से उड़ न जाए
घूँघट को दाँतों में दबाना,
काजल का आँखों में लगाना।

क्यूँ छूटता जा रहा,
व्यर्थ की भागदौड़ में
श्रृंगार में गजरे,वेणी,
रास्ता भूले बालों का।

प्रिय का सीधा नाम बोलने की बातें,
कुछ खाने-पीने की चीजें
बच्चों के हाथ भेजने का चलन,
साड़ी-उपहार
छुपाकर देने की आदतें,
ऑन लाइन शॉपिंग निगल गई।

हमारे पुराने ख्यालात में,
प्रेम मनुहार बसा था
नए ख्यालातों को तो,
दिखावा निगल गया।

संग बैठ कर खाने,
पार्क में पिकनिक मनाने के,
समय को
इलेक्ट्रॉनिक बाजार निगल गया।

इंसान तो वही है,
मगर समय बदल गया
या तो समय के साथ,
हम बदल गए।

सुख-चैन अब कौन-सी दुकान पर मिलता,
जरा बताओ तो सही !
दिखावा और बेवजह की,
मृगतृष्णा-सी दौड़ में
हमारी आँखों से आँसू,
जैसे भाप बनकर उड़ने लगे।

मुस्कान से गालों में पड़ने वाले गड्ढों को,
भागदौड़ भरी शैली निगल गई।
क्या जिंदगी इतनी आधुनिक हो गई!
या हम बदल गए…॥

परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्में श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर जिला-धार (म.प्र.)है। भाषा ज्ञान हिंदी और अंग्रेजी का रखते हैं। आपकी शिक्षा हायर सेकंडरी और आयटीआय है। कार्यक्षेत्र-नौकरी( मानचित्रकार के पद पर सरकारी सेवा)है। सामाजिक गतिविधि के तहत समाज की गतिविधियों में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत,दोहा,हायकु,लघुकथा कहानी,उपन्यास, पिरामिड, कविता, अतुकांत,लेख,पत्र लेखन आदि है। काव्य संग्रह-दरवाजे पर दस्तक,साँझा उपन्यास-खट्टे-मीठे रिश्ते(कनाडा),साझा कहानी संग्रह-सुनो,तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो और लगभग २०० साँझा काव्य संग्रह में आपकी रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर ३८ साल से रचनाएँ छप रहीं हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में देश-प्रदेश-विदेश (कनाडा)की विभिन्न संस्थाओं से करीब ५० सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले संजय वर्मा की विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी के संग साहित्य को बढ़ावा देना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,तो प्रेरणा पुंज-कबीर दास हैंL विशेषज्ञता-पत्र लेखन में हैL देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-देश में बेरोजगारी की समस्या दूर हो,महंगाई भी कम हो,महिलाओं पर बलात्कार,उत्पीड़न ,शोषण आदि पर अंकुश लगे और महिलाओं का सम्मान होL