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इन्सान झुलसने लगा

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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यह महासंग्राम है,
भयंकर गर्मी का
सबसे बड़ा उधम है,
जीवन की खुशियाँ बिखरने लगी है
पेड़-पौधों से रंग उतरने लगा है,
शबनम अब दिखाई नहीं देती
होश में कोई नज़र नहीं आता,
यह हमारे ख़ुद के कारण है
कुछ नहीं अकारण है।

नदियाँ खो गई है,
जलाशयों में जल नहीं है
पोखर और कुएं बदहाल हैं,
सब कुछ बेहाल है
सूर्य की किरणें स्पष्ट दिखाई देती है,
नज़रें चुराती नहीं
सामने कुछ भी दिखाई देती है।

यह मानवीय अनाचार है,
प्रकृति से खिलवाड़ है
नैतिकता और चरित्र नहीं रहा सुरक्षित,
सब जगह सब बेहाल है
तन का पसीना नहीं सूख रहा है,
मजदूरों की हालत सबसे बुरी है
नज़र आती नहीं है कुछ उम्मीद,
सबमें दिखती है नाउम्मीदी व विषाद।

यह आज़ की तस्वीर है,
सब जगह गमों की मुनादी कराए जाने की
दिखती तस्वीर है
यह जलवायु परिवर्तन का,
एक बेहद तकलीफ़देय समां है
इसमें नहीं दिखता कोई,
साफ़-सुथरा आसमां है।

हमें आज़ सुरक्षित रहने की जरूरत है,
यही आज़ की हकीकत और
जन-जन को स्वीकार्य सच्चाई,
हमेशा सबके लिए बन गई अकीदत है।

आओ हम-सब मिलकर यहां एक,
सुन्दर और स्नेहिल संसार बनाएं।
सपनों को साकार करने के लिए,
हमेशा सबके सम्मुख उपस्थिति दर्ज कराएं॥

परिचय–पटना (बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता, लेख, लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम., एम.ए.(अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी, इतिहास, लोक प्रशासन व ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी, एलएलएम, एमबीए, सीएआईआईबी व पीएच.-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन) पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित कई लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिसमें-क्षितिज, गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा) आदि हैं। अमलतास, शेफालिका, गुलमोहर, चंद्रमलिका, नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति, चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा, लेखन क्षेत्र में प्रथम, पांचवां व आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के कई अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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