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कलियुग है क्या !

हेमराज ठाकुर
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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नेता है लेते लुत्फ सत्ता का, अधिकारी बने सहयोगी है,
भ्रष्टाचार और महंगाई हर राज में, जनता ने ही भोगी है।

यह पेट्रोल बढ़ा-यह डीजल बढ़ा, यह तो बात पुरानी है,
सरकारी तन्त्र में भ्रष्टाचार की, सबको मालूम कहानी है।

बदसलूकों की महफिल में, शराफत की बात बेईमानी है,
नीचे से ऊपर ये सारे मिले हैं, किससे आवाज उठानी है ?

खरीद तंत्र घोटाला, भर्ती घोटाला, सिर से ऊपर पानी है,
अनुदान लेती जनता भी देखो, हो गई कितनी सयानी है ?

दुर्दशा देश की होती है तो हो, सबको अपनी चिन्ता है,
महास्वार्थ के इस दौर में, हर मानव में कितनी हीनता है ?

पंचायत से घोटाले संसद तक, जांच एजेंसियां भी डूबी है,
न्यायालयों के दरवाजों के आगे, विलम्ब की झाड़ी उगी है।

गरीब जाए तो किधर को जाए ? चारों ही ओर तो अंधेरा है,
‘मत’ की चोट से हर राज है बदला, सबमें लुटेरों का डेरा है।

हम सब जानते सच्चाई पर जाने, कैसे इस आग में जिंदा हैं ?
इसी में ढलना मजबूरी है सबकी, इस बात से शर्मिंदा हैं।

घोर कलियुग है आ गया क्या ? हर ओर जो आपा-धापी है,
ऐसा है लगता, देखता हूँ, इन्साफ की चौखट में बेइंसाफी है॥

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