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नारी तू नारायणी

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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माँ-बहन-बेटी तू
तेरे रूप अनेक,
जग कल्याणी माँ ने
धरे स्वरूप अनेक,
दुर्गा बनी
कभी कामायनी,
नारी तू नारायणी।

राधा कृष्ण की
सखी बन आई,
सीता ने कुल
लाज निभाई,
दयावान तू
भव तारिणी,
नारी तू नारायणी।

धीरज तुझमें
धरती माँ जैसा,
सह लेती दुःख
चाहे हो कैसा,
दुःख हरणी
सुखदायिनी,
नारी तू नारायणी।

ममता की सुंदर
मूरत है तू,
ईश्वर की दूजी
सूरत है तू,
ज्ञान की देवी
वीणावादिनी,
नारी तू नारायणी।

कभी प्रेम का
मधुर राग है,
दिल में कभी
धधकती आग है,
शक्ति स्वरूपा
वरदायिनी,
नारी तू नारायणी।

देवी का
अवतार है नारी,
असुरों पर
वो पड़ती भारी,
माँ दुर्गा तू
सिंहवाहिनी।
नारी तू नारायणी।

घर-परिवार की
धुरी है,
मन में रखती
सबूरी है,
गंगा-सी पावन
मंदाकिनी,
नारी तू नारायणी।

नारी का
अपमान न करना,
पछताना
पड़ेगा वरना।
नारी पुरुष की
अर्धांगिनी,
नारी तू नारायणी॥

परिचय– श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।