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खूबसूरत है कश्मीर

दीपा गुप्ता ‘दीप’
बरेली(उत्तर प्रदेश)
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इस बार होली पर कहीं बाहर घूमने के लिए बच्चे काफी से दिन कह रहे थे काफी समय से सपरिवार कहीं बाहर जाना नहीं हुआ थाl अतः तय किया कि इस बार होली पर कश्मीर घूमने चला जाए,बच्चों ने कश्मीर की फ्लाइट बुक कराई तो लगने लगा अब तो जाना ही है।
२८ की शाम में हमने प्रस्थान किया ट्रेन से दिल्ली तक का सफरl मौसम सुहावना था,रास्ते में खेत-खलिहान,कारखाने चारों ओर बादलों का जमावड़ा बहुत खूबसूरत नज़ारे थे,सुबह ७ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर थेl टर्मिनल ३ से ११ बजे की फ्लाइट थी,अतः समय से औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हम लगभग डेढ़ घण्टे के लिए आराम से यानि आजाद थे,सो सोचा कुछ फोटोग्राफी कर ली जाएl वैसे भी टर्मिनल ३ की खूबसूरती से सभी परिचित होंगे,हमने बहुत सारी सुंदर-सुंदर तस्वीरें खींचींl इतनी देर में उड़ान(फ्लाइट) का समय हो गयाl सबने हवाईजहाज में प्रवेश किया,कुछ मिनटों में हम बादलों के ऊपर और आसमान के नीचे थेl धरती नजर नहीं आ रही थी,अब बस चारों ओर आसमान ही दिख रहा था।
ठीक १ बजे हम कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में थे,उड़ान से बाहर आकर अपना सामान आने की प्रतीक्षा की और सामान मिलते ही हम बाहर बुक की हुई इनोवा से सीधे अपने होटल ममता गैलेक्सी पहुँचेl वहां लंच लेकर एवं अपना सामान बंद करके हम अपनी टैक्सी से श्रीनगर घूमने निकल पड़े।
निशात बाग,शालीमार बाग,चश्मेशाही बाटनिकल गार्डन, डल झील में शिकारा बोट की सैर,हाउसबोट के बाजार में आदि में भी सैर की। अगले दिन होली की सुबह नहा-धोकर हम सबसे पहले आदि शंकराचार्य जी के मंदिर दर्शन करने निकल पड़ेl हल्की-फुल्की बूंदाबांदी हो रही थी,मौसम बहुत सुहावना था,चारों ओर सुंदर नज़ारे दिखाई दे रहे थेl मंदिर काफी ऊंचाई पर था,सीढ़ियों का रास्ता थाl ऊपर काफी ठंडी थी,नँगे पैर चलने में पैरों में गलन हो रही थीl मंदिर में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करके हमने पहले भोलेनाथ के फिर एक-दूसरे के गुलाल लगाकर शगुन किया।
हमारा अगला पड़ाव गुलमर्ग थाl सुना था आजकल वहां बर्फ़बारी हो रही हैl हम खुश थे कि हमें बर्फबारी देखने को मिलेगीl गुलमर्ग में पहाड़ों की चोटियां बर्फ से ढकी थीl हम किराए के रेनकोट और बूट पहन कर स्लेज गाड़ी से ऊपर सारे मोड़ देखने निकल पड़ेl हर स्लेज गाड़ी को चलाने के लिए एक व्यक्ति साथ में थाl बीच में एक जगह रुककर हम सबने स्कीइंग भी की। लगभग शाम हो गई गुलमर्ग से लौटते-लौटते।
वापस आकर अपने होटल में ही भोजन करके हम समय से सो गए, क्योंकि अगले दिन हमें पहलगाम घूमने जाना थाl सुबह ऐप्पल गार्डन होते हुए हम पहलगाम पहुंच गएl बारिश हो रही थी,आगे घोड़े से जाना था पुनः रेनकोट और बूट पहनकर घोड़े से आगे की सैर पे निकल पड़ेl आगे का सफर बहुत रोमांचक थाl पहाड़ बर्फ से ढंके थे,बर्फ रुई के गोले की तरह गिर रही थीl रास्ता बहुत पथरीला,घुमावदार ऊंचा-नीचा था काफी डर लग रहा था,जब घोड़ा एकदम नीचे या ऊपर होता था क्योंकि चारों ओर पहाड़ और नीचे गहरी घाटी थींl इसी क्रम में आगे मिनी स्विट्जरलैंड पर भी गए,अन्य प्वांइट पर घूमते एवं फोटोग्राफी करते हुए हम वापस शाम तक अपने होटल में थे।
अगली सुबह १० बजे की उड़ान थी,इसलिए ७ बजे एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए टैक्सी समय पर आ गई थी। सारे सामान सहित हम कुछ समय में ही श्रीनगर एयरपोर्ट पर थेl तय समय पर उड़ान में सवार होकर हमें १ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर आना था,किंतु मौसम खराब होने के कारण उड़ान विलंब से लगभग पौने दो बजे दिल्ली पहुँची।
दिल्ली में बेटी के घर दिन व्यतीत करके सारी बातें सुनाने एवं छोटी इल्हाना के साथ बतियाने में समय का पता ही नहीं चलाl रात को लखनऊ मेल से वापस अपने गंतव्य आकर अपनी यादगार सैर को आप सबसे साझा करने का आज मौका निकाल पाईl

परिचय-दीपा गुप्ता का निवास उत्तर प्रदेश के बरेली में है। साहित्यिक उपनाम-दीप है। इनकी जन्म तारीख २२ जुलाई १९६६ एवं जन्म स्थान-बरेली है। भाषा ज्ञान-हिंदी एवं अंग्रेजी का है। उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाली दीप ने स्नातकोत्तर की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में गृहिणी होकर सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत सेवाभावी संस्था की अध्यक्ष रह चुकी हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल, लेख आदि है। प्रकाशन में ३ एकल संग्रह-बालदीप (भाग-१,२ एवं ३) आ चुके हैं तो ३ साझा संग्रह-‘रिश्तों के अंकुर’, ‘पितृ विशेषांक’ और ‘काव्य पुंज’ भी प्रकाशित है। ३ साझा संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित हो रहे हैं। ऐसे ही अनेक रचनाएं समाचार पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपको प्राप्त सम्मान में-साहित्य सागर,मुक्तक लोक, ‘हिंदी सेवी’ सम्मान, ‘शब्द श्री’ सम्मान, ‘साहित्य भूषण’ सहित ‘श्रेष्ठ रचनाकार’ सम्मान प्रमुख हैं। विशेष उपलब्धि में केन्द्रीय मंत्री द्वारा संग्रह को शुभकामना संदेश देना है। लेखनी का उद्देश्य-भारत के भविष्य को गढ़ने में योगदान देना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-बाबा हैं। इनकी विशेषज्ञता-बाल गीत लेखन में है।