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गाँव की रात

ओमप्रकाश अत्रि
सीतापुर(उत्तरप्रदेश)
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अभी-अभी
घुप्प अंधेरे में,
छिप जाएंगी
ये गाँव की गलियाँ,
गलियारे पर
हो रही
पैरों की पदचाप,
अभी-अभी
ठप्प हो जाएगी।
धीरे-धीरे,
घरों में
बुझ जाएंगी
जल रही ढिबरियां,
पूरे गाँव में
थकान से भरा सन्नाटा,
पसर-सा जाएगा।
सांय-सांय
करती हुई रात में,
अभी-अभी
शुरु होगी
कुत्तों की गश्त,
दूर गन्ने के खेतों से
सियारों के हूकने की आवाजें,
आने लगेंगी।
विघ्न,
बनने लगेगा
पसरे हुए सन्नाटे में,
करवट बदलने से
खटिया की चरचराहट,
किसी बूढ़े-बुजुर्ग के
खाँसने की आवाज।
अभी
आने लगेगी,
मुँह से स्तन के छूट जाने पर
किसी नवजात शिशु के
रोने की आवाज,
माँ की
थपकियों से,
बच्चे के रोने की ध्वनि
कुलबुलाहट में बदल जाएगी।
तभी
आने लगेगी,
गौढ़ी से
गाय के मूतने से
छलछलाहट की आवाज़,
और
किसी भैंस के
हगने की आवाज
भच्च से आएगी।
कुछ क्षण,
यह सब
चलने के पश्चात,
फिर
काली रात,
सन्नाटे से भर जाएगी।
एकदम शान्त…
बगैर
कोई करतल के,
जुगनूओं की चमचमाहट में
सांय-सांय के
खर्राटे को लेकर,
रात सोने लगेगी॥

परिचय-ओमप्रकाश का साहित्यिक उपनाम-अत्रि है। १ मई १९९३ को गुलालपुरवा में जन्मे हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल स्थित विश्व भारती शान्ति निकेतन में रहते हैं,जबकि स्थाई पता-गुलालपुरवा,जिला सीतापुर है। आपको हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी सहित अवधी,ब्रज,खड़ी बोली,भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाले ओमप्रकाश जी की पूर्ण शिक्षा-बी.ए.(हिन्दी प्रतिष्ठा) और एम.ए.(हिन्दी)है। इनका कार्यक्षेत्र-शोध छात्र और पश्चिम बंगाल है। सामाजिक गतिविधि में आप किसान-मजदूर के जीवन संघर्ष का चित्रण करते हैं। लेखन विधा-कविता,कहानी,नाटक, लेख तथा पुस्तक समीक्षा है। कुछ समाचार-पत्र में आपकी रचनाएं छ्पी हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-शोध छात्र होना ही है। अत्रि की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य के विकास को आगे बढ़ाना और सामाजिक समस्याओं से लोगों को रूबरू कराना है। इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ सहित नागार्जुन और मुंशी प्रेमचंद हैं। आपके लिए प्रेरणा पुंज- नागार्जुन हैं। विशेषज्ञता-कविता, कहानी,नाटक लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
“भारत की भाषाओंं में है 
अस्तित्व जमाए हिन्दी,
हिन्दी हिन्दुस्तान की न्यारी
सब भाषा से प्यारी हिन्दी।”

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