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जय श्री राम

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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अवध में फिर सुहाना राम शासन आ गया है,
नहीं है जोर झूठे का अधिक, बतला गया है।

कभी चौदह बरस में लौट आये थे अयोध्या,
उन्हें पाँच सौ वर्षों टेंट कलि ठहरा गया है।

निभाया साथ आक्रांता गिरा कर साख अपनी,
हमें लगता उसे रावण परिजन बता गया है।

किया विध्वंस थाती औ धरोहर गैर थे वे,
हमारा घर, लेक़िन घर का भेदी खा गया है।

न गौरव भूल, भारत माँ कसम देती तुझे है,
रखो तुम लाज, कितनना मान वीरों का गया है।

गुलामी राम की कर, काम बिगड़े वे बनाते,
धरम संस्कार वाला युग सनातन आ गया है॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।